ASM Category क्या होता है / ASM Category Meaning In Hindi

दोस्तों, यदि आप शेयर बाज़ार में निवेश करते होंगे तब आपने, अपने शेयर को ASM Category, GSM Category या ESM Category में चले जाने के बारे में अवश्य सुना होगा | लेकिन क्या आप इस ASM, GSM तथा ESM कैटेगरी को जानते है कि ये क्या होते है, किसी शेयर के इस कैटेगरी में जाने का क्या अर्थ है, किसी शेयर इन कैटेगरी में जाने के क्या क्या कारण हो सकते है?

मेरे प्यारे पाठकों आज के अपने इस लेख में हम सब सेबी तथा एक्सचेंज द्वारा बनाये गए ASM कैटेगरी के बारे में चर्चा करेंगे तथा जानेंगे कि किसी कंपनी को एक्सचेंज ASM कैटेगरी में क्यों डालती है, यदि किसी शेयर को इस कैटेगरी में शामिल कर लिया गया है तब इससे शेयर प्राइस पर इसका क्या असर पड़ता है, के साथ-साथ हम समझेंगे कि यदि कोई कंपनी इस कैटेगरी में चला गया है तो एक निवेशक को क्या-क्या सावधानी बरतनी चाहिए |

Table of Contents

ASM Category क्या होता है / ASM Category Meaning In Hindi

भारतीय प्रतिभूति विनिमय बोर्ड (सेबी) और एक्सचेंजों द्वारा बाज़ार के नियम-कानून तथा निवेशको के हितों की रक्षा के लिए अतिरिक्त निगरानी उपाय (ASM) कैटेगरी को इजाद किया गया है | एक्सचेंज को जब भी किसी शेयर में अनियमित ट्रेड, वॉल्यूम, या कुछ ऐसा लगता है कि शेयर के चाल को किसी विशेष व्यक्ति या संस्था द्वारा नियंत्रित किया जा रहा है तब एक्सचेंज अपनी निगरानी करने के लिए इसे ASM कैटेगरी में डाल देता है |

ASM का फुल फॉर्म Additional Surveillance Measure अर्थात अतिरिक्त निगरानी उपाय है | इस कैटेगरी में शेयर को शामिल करने के लिए कुछ मानक तैयार किये गए | यदि कोई शेयर इनके इन मानकों को पूरा नहीं करता है तब इस शेयर की निगरानी करने के लिए इसे Additional Surveillance Measure कैटेगरी में शामिल कर लिया जाता है तथा निगरानी किया जाता है |

ASM कैटेगरी के पैरामीटर (ASM category parameters)

ASM कैटेगरी में डालने के लिए एक्सचेंज ने अपने कुछ पैरामीटर तैयार किये है | एक्सचेंज को जब भी लगता है कि कोई शेयर उनके द्वारा बनाये गए पैरामीटर का अनुसरण नहीं कर रहा है तब एक्सचेंज उन शेयर को अपनी निगरानी में रखने के लिए उन्हें ASM कैटेगरी में रख लेती है | तो अब हम सब एक-एक कर उन पैरामीटर को बिन्दुवार समझने का प्रयास करते है जो निम्न है | क्रिप्टो करेंसी क्या है?

  • High Low Variation
  • Close to Close Price Variation
  • Volume Variation
  • Client Concentration
  • Market Capitalization
  • No. of Price Band Hits
  • Delivery Percentage
  • No. of Unique PANs

High Low Variation (उच्च निम्न विविधता)

एक्सचेंज को जब ऐसा लगे कि किसी शेयर में प्राइस मूवमेंट बहुत अधिक हो तब एक्सचेंज इसे ASM कैटेगरी में शामिल कर अपने निगरानी में रखता है | अब ये प्राइस मूवमेंट अप साइड हो डाउन साइड इससे फर्क नहीं पड़ता | जब भी एक्सचेंज को इनके प्राइस मूवमेंट में संदेह होता है तब वो इसे ASM फ्रेमवर्क में डाल देती है | सोते-सोते पैसे कमाए / Passive Income Ideas

ASM Category क्या होता है / ASM Category Meaning In Hindi

Close to Close Price Variation

जब भी एक्सचेंज को लगता है कि किसी कंपनी के शेयर में आज क्लोजिंग कीमत तथा अगले दिन के क्लोजिंग कीमत में भिन्नता अधिक हो रही है तब इसके निगरानी के लिए इसे एएसएम कटेगरी में डाल दिया जाता है |

Volume Variation (वॉल्यूम भिन्नता)

यदि किसी कंपनी के महीने का औसत डेली वॉल्यूम(Average Daily Volume) 10,000 प्रति शेयर से अधिक हो अथवा किसी कंपनी के महीने भर का औसत वॉल्यूम, पिछले तीन महीने के औसत वॉल्यूम से 500 प्रतिशत या इससे अधिक से बढ़ जाये तब इस कंपनी के शेयर पर निगरानी बढाने के लिए इसे ASM कैटेगरी में शामिल कर लिया जाता है | पताका चार्ट पैटर्न क्या है?

Client Concentration

जब भी एक्सचेंज को लगता है कि किसी कंपनी के शेयर में किसी विशेष व्यक्ति या किसी संस्था द्वारा या कुछ चुनिन्दा लोगों द्वारा बहुत अधिक निवेश या ट्रेड किया जा रहा है तब इनके निगरानी के लिए एक्सचेंज इन्हें ASM कैटेगरी में डाल देती है | इसमें टॉप 25 स्टेक होल्डर पर निगरानी की जाती है |

Market Capitalization (बाजार पूंजीकरण)

यदि किसी कंपनी का मार्केट कैप बहुत अल्प समय में बहुत बढ़ जाये या कम हो जाये या किसी कंपनी का मार्केट कैप उसके वास्तविक एसेट से बहुत अधिक या बहुत कम हो गया हो तब भी कंपनी के शेयर में मैनिपुलेशन(Manipulation) होने का अंदेशा होता है ऐसे में एक्सचेंज इन कंपनी के शेयरों को ASM कैटेगरी में डाल दिया जाता है | शेयर खरीदने और बेचने का उत्तम समय ?

No. of Price Band Hits (प्राइस बैंड हिट्स की संख्या)

यदि किसी कंपनी में लगातार अपर सर्किट या लोअर सर्किट लगता जा रहा है मतलब ऐसा कई दिन होता है कि कंपनी का शेयर सर्किट टू सर्किट ट्रेड कर रहा है तब इसकी जाँच करने के लिए कंपनी के शेयर को ASM कैटेगरी में डाल दिया जाता है |

Delivery Percentage (डिलिवरी प्रतिशत)

यदि पिछले तीन महीने का औसत डिलीवरी परसेंटेज(Average Delivery Percentage) 50 प्रतिशत से भी कम हो जाता है तब ऐसे कंपनी को ASM कैटेगरी में डाला जा सकता है |

No. of Unique PANs (अद्वितीय पैन की संख्या)

जब भी एक्सचेंज को ऐसा लगता है कि कुछ चुनिन्दा पैन कार्ड धारक द्वारा ही किसी कंपनी के शेयर में बड़ी बिकवाली या खरीदारी की जा रही हो तो एक्सचेंज इसपर निगरानी के लिए इसे ASM फ्रेमवर्क में शामिल कर लिया जाता है | प्राइस एक्शन ट्रेडिंग क्या है ?

ASM कैटेगरी के प्रकार (Types of ASM Categories)

ASM कैटेगरी दो प्रकार के होते है |

  • शोर्ट टर्म ASM कैटेगरी
  • लॉन्ग टर्म ASM कैटेगरी

शोर्ट टर्म ASM कैटेगरी (Short Term ASM Category)

शोर्ट टर्म ASM कैटेगरी में कुल दो चरण(Stage) होते है | जब किसी कंपनी के शेयर को एक्सचेंज शोर्ट टर्म ASM कैटेगरी में डालती है तब वो पहले इसे Stage-1 में रखती है, जिसे STASM-1 से दर्शाया जाता है |

ASM Category क्या होता है / ASM Category Meaning In Hindi

यदि कंपनी के शेयर में सुधार नहीं होता है तब एक्सचेंज इसे Stage-2 में शामिल कर देती है जिसे STASM-2 से दर्शाया जाता है |

सेबी या एक्सचेंज क्या करती है

  1. जब एक्सचेंज को लगता है कि कॉर्पोरेट (Corporate) में किसी प्रकार का कोई न्यूज है जिसे कुछ ही लोगों को पता है तब सेबी या एक्सचेंज उस कंपनी के शेयर को STASM-1 में डाल देती है तथा उस कंपनी से इसके बारे पूछ ताछ करती है | यदि इस प्रकार का कोई न्यूज होता है तो उसे सार्वजनिक किया जाता है तथा इस कंपनी के शेयर को STASM-1 से ही बाहर कर दिया जाता है | इसके अलावा ट्रेडिंग के मार्जिन को 50% कर दिया जाता है |
  2. दुसरे स्टेज में आ जाने के बाद ट्रेडिंग के मार्जिन को 100 प्रतिशत तक बढ़ा दिया जाता है |

लॉन्ग टर्म ASM कैटेगरी (Long Term ASM Category)

लॉन्ग टर्म ASM कैटेगरी में कुल चार चरण होते है | जब किसी कंपनी का शेयर शोर्ट टर्म ASM कैटेगरी के स्टेज 2 में जाने के बाद भी कोई सुधार नहीं होता है तब एक्सचेंज इनको लॉन्ग टर्म ASM कैटेगरी (LTASM) के स्टेज 1 में शामिल कर लिया जाता है | यदि कंपनी के शेयर में ट्रेडिंग की अनियमितता बनी रहती है तब इसे क्रमशः स्टेज – 2 स्टेज – 3 तथा स्टेज – 4 में शामिल कर ट्रेडिंग के नियमों में कडाई लाते जाते है |

जब एक्सचेंज को लगता है कि कंपनी के शेयर में नियमित ट्रेडिंग होना आरंभ होगया है तब एक्सचेंज इसे क्रमिक रूप से बाहर निकालती जाती है | अब हम ये समझने का प्रयास करते है कि किसी कंपनी के शेयर के ASM कैटेगरी में चले जाने के बाद उनपर क्या प्रभाव पड़ता है | डिविडेंट क्या है ? what is dividend

सेबी या एक्सचेंज क्या करती है

लॉन्ग टर्म ASM कैटेगरी में शेयर के शामिल हो जाने के बाद इनपर निम्न परिवर्तन किये जा सकते है |

  • ट्रेडिंग का मार्जिन 100 प्रतिशत तक किया जा सकता है |
  • कंपनी के शेयर का सर्किट बैंड को कम किया जा सकता है |
  • हर दिन ट्रेडिंग न होकार साप्ताह में एक या दो दिन ट्रेडिंग की इजाजत |
  • डे फॉर डे ट्रेडिंग किया जा सकता है अर्थात डे-ट्रेडिंग या इंट्राडे ट्रेडिंग को बंद किया जा सकता है |

ASM फ्रेमवर्क से कंपनी के शेयर कब बाहर आते है?

किसी कंपनी के शेयर स्टेज -1 में 5 से लेकर 15 दिनों तक रहते है | इन दिनों में यदि कंपनी के शेयर एक्सचेंज के मानकों पर खरी उतर गयी तब इसे ASM फ्रेमवर्क से बाहर कर दिया जायेगा अन्यथा की स्थिति में इसे ASM फ्रेमवर्क के स्टेज(Stage)- 2 में डाल दिया जायेगा | स्टेज 2 का सायकिल 30 दिन का होता है, अर्थात अब 31 ट्रेडिंग दिवस में इसकी समीक्षा की जाएगी | यदि कंपनी का शेयर ASM फ्रेमवर्क के स्टेज 3 में आ गया तो बाहर निकलने में 45 दिवस तथा स्टेज 4 में जाने के बाद 45 से 60 दिन लग सकते है |

यहाँ पर दिवस का अर्थ ट्रेडिंग दिवस से है अर्थात जिस दिन एक्सचेंज बंद होते है उस दिन गिनती नहीं कि जाती है | कंपनी के शेयर में स्टेबिलिटी आने के बाद जिस क्रम में कंपनी के शेयर स्टेज 4 में पहुंचते है उसी क्रम में बाहर आते है | अतः यदि कोई शेयर ASM फ्रेमवर्क के स्टेज 4 में चला गया है तब इसे बाहर आने में 6 महीने तक का समय लग सकता है | मल्टीबैगर स्टॉक (Multibagger Stock) को कैसे पहचाने ?

ASM कंपनियों की सूची (ASM Companies List)

अब सवाल ये है कि हम ये कैसे पता करें कि कौन सी कंपनी ASM लिस्ट में है कौन सी नहीं | हम आपको बताना चाहेंगे कि आप ASM कैटेगरी की सूची को उस एक्सचेंज की वेबसाइट पर बड़ी आसानी से देख सकते है | वेबसाइट पर लॉन्ग टर्म ASM लिस्ट और शॉर्ट टर्म ASM लिस्ट को अलग-अलग दर्शाया जाता है |

वर्तमान में शॉर्ट टर्म ASM लिस्ट में 64 कंपनियों के शेयर तथा लॉन्ग टर्म ASM लिस्ट में 220 कंपनियों के शेयर शामिल है | ये लिस्ट समय-समय पर अपडेट होती रहती है | आज चाहे तो nseindia.com/reports/asm पर क्लिक कर सीधे ASM कंपनियों के लिस्ट पर पहुँच सकते है |

ASM लिस्ट में शामिल हो जाने पर क्या करें?

यदि आप द्वारा निवेशित किसी कंपनी को एक्सचेंज द्वारा ASM कैटेगरी में डाल दिया जाता है तब आपको घबराने की बिलकुल आवश्यकता है | क्यों कि यदि आपने निवेश किया है तब आपने कंपनी के फंडामेंटल तथा इसके ग्रोथ को देख कर शेयर ख़रीदा होगा | कंपनी के शेयर को ASM फ्रेमवर्क में शामिल हो जाने के बाद भी इसके फंडामेंटल में कोई बदलाव नहीं होगा | कंपनी अपना बिजनेस सही तरीके से करती रहती है | ROCE क्या है? ROCE Meaning In Hindi

ASM Category क्या होता है / ASM Category Meaning In Hindi

शेयर के ASM कैटेगरी में शामिल हो जाने का अर्थ है कि इनके खरीद-बिक्री तथा खरीद-बिक्री करने वाले व्यक्तियों पर निगरानी की जाएगी | जब भी किसी कंपनी का शेयर ASM कैटेगरी में चला जाता है तब इसमें ट्रेडिंग बहुत कम हो जाती है, ट्रेडिंग के वॉल्यूम गिर जाते है, कोई भी बड़ा निवेशक, बड़ा निवेश या बड़ा ट्रेड नहीं कर पाता है | इस कारण से जब तक कंपनी का शेयर इस कैटेगरी में रहता है तब तक कंपनी के शेयर आम तौर पर बड़ी तेज़ी नहीं दिखा पाता है | इस कारण से आप द्वारा निवेशित पूंजी ग्रो नहीं कर पाती है, हो सकता है कि कंपनी के शेयर में गिरावट भी हो |

लेकिन मेरी राय में आपको ऐसी कंपनी में थोडा-थोडा करके निवेश करते रहना चाहिए | ये कंपनिया जब ASM फ्रेमवर्क से बाहर निकलती है तब बहुत तेज़ी के साथ ऊपर निकल जाती है | यदि आप ऐसे कंपनी में निवेश करने जा रहे है जो पहले से ही ASM कैटेगरी में है तथा आपको उस कंपनी के फंडामेंटल पसंद आते है तब आप कंपनी के शेयर में धीरे-धीरे निवेश करना आरंभ कर सकते है ताकि जब कंपनी के शेयर बाहर निकले तो आपको बड़ा मुनाफा हो | ट्रेडिंग करने वाले ट्रेडर ASM कैटेगरी के शेयर से दूर रहते है | निफ्टी 50 में ट्रेडिंग कैसे करें

इस लेख से सम्बंधित प्रश्नोत्तरी

ASM Category क्या होता है

एक्सचेंज को जब भी किसी शेयर में अनियमित ट्रेड, वॉल्यूम, या कुछ ऐसा लगता है कि शेयर के चाल को किसी विशेष व्यक्ति या संस्था द्वारा नियंत्रित किया जा रहा है तब एक्सचेंज अपनी निगरानी करने के लिए इसे ASM कैटेगरी में डाल देता है |

ASM का फुल फॉर्म क्या होता है?

ASM का फुल फॉर्म Additional Surveillance Measure अर्थात अतिरिक्त निगरानी उपाय है | इस कैटेगरी में शेयर को शामिल करने के लिए कुछ मानक तैयार किये गए | यदि कोई शेयर इनके इन मानकों को पूरा नहीं करता है तब इस शेयर की निगरानी करने के लिए इसे Additional Surveillance Measure कैटेगरी में शामिल कर लिया जाता है तथा निगरानी किया जाता है |

ASM कैटेगरी में क्या-क्या पाबन्दी हो सकती है?

ट्रेडिंग का मार्जिन 100 प्रतिशत तक किया जा सकता है |
कंपनी के शेयर का सर्किट बैंड को कम किया जा सकता है |
हर दिन ट्रेडिंग न होकार साप्ताह में एक या दो दिन ट्रेडिंग की इजाजत |
डे-ट्रेडिंगअर्थात इंट्राडे ट्रेडिंग कोबंद किया जा सकता है |

आज हमने जाना(Today We Learned)

आज ASM Category क्या होता है / ASM Category Meaning In Hindi के इस लेख में हम सबने जाना ASM कैटेगरी क्या होता है, इसे बनाने के पीछे एक्सचेंज तथा सेबी की क्या मंशा है, के साथ साथ हमने जाना कि ASM कैटेगरी कितने प्रकार की होती है |

मुझे आशा है कि अब आपको ASM Category से सम्बंधित समस्त प्रकार के सवालो के जवाब मिल गए होंगे | यदि आपको हमारा यह पोस्ट अच्छा लगा हो तो इसे अपने दोस्तों के साथ अवश्य शेयर करें |

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