तरलता(लिक्विडिटी) क्या है / liquidity kya hai Full Details in Hindi

मेरे प्रिय पाठकों आपने शेयर बाज़ार में लिक्विडिटी(Liquidity) शब्द का प्रयोग तो कई बार सुना होगा | लेकिन क्या आप जानते है कि ये लिक्विडिटी किस चिड़ियाँ का नाम है | लिक्विडिटी के कम या अधिक हो जाने पर बाज़ार पर इसका क्या फर्क पड़ता है | तो आईये आज के इस अंक में हम सब लिक्विडिटी से जुडी सभी पहलू को समझने का प्रयास करते है |

तरलता क्या है / liquidity meaning in hindi

किसी पदार्थ का वह गुण जिससे वह जीतनी आसानी से एक स्थान से दुसरे स्थान पर चला जाता है उसे उस पदार्थ की तरलता कहा जाता है | जैसे पानी | यदि पानी को आप एक स्थान पर बांध कर नहीं रखेंगे तब यह अपने आप एक स्थान से दुसरे स्था पर चला जायेगा | गैस भी एक तरल पदार्थ का उदाहरण है | ठोस पदार्थ सबसे कम तरल माने जाते है | 

मुद्रा की तरलता/लिक्विडिटी 

कोई मुद्रा जीतनी आसानी से एक स्थान से दुसरे स्थान पर चला जाता है उसे उस मुद्रा का तरलता कहा जाता है | एक स्थान से दुसरे स्थान का अर्थ है आसानी से ट्रांजेक्शन होना है | जैसे – कैश को सबसे तरल मुद्रा माना जाता है | क्योकि कैश से आप कोई भी खरीद बिक्री बड़ी आसानी से कर सकते है |

तरलता के प्रकार(types of liquidity in Hindi)

लिक्विडिटी मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है |

  • नेचुरल तरलता
  • बाहरी तरलता

नेचुरल तरलता (Natural Liquidity in Hindi)

हर एसेट की एक नेचुरल लिक्विडिटी होती है जिस पर वह एसेट हमेशा कार्य करता है | इसमे किसी बाहरी कारक का कोई रोल नहीं होता है | जैसे – कैश की लिक्विडिटी सर्वाधिक होती है | ये नेचुरल लिक्विडिटी है | कैश हमेशा अधिक लिक्विडिटी के साथ कार्य करती है | भले ही कुछ न्यूज के कारण इसके लिक्विडिटी में थोडा बहुत फर्क आ जाये, लेकिन कुछ समय पश्चात ये फिर से अपने मूल स्थिति में वापस आ जाएगी | वॉरेन बफेट का जीवन दर्शन

बाहरी तरलता (external liquidity in Hindi)

ऐसी तरलता जिसपर बाहरी कारक का सर्वाधिक प्रभाव पड़ता है उसे बाहरी तरलता (external liquidity) कहा जाता है | बाहरी लिक्विडिटी को शेयर बाज़ार में अक्सर देखा जाता है | कंपनी के शेयर अपने लिक्विडिटी के हिसाब से ट्रेड कर रहे होते है |

लेकिन कोई न्यूज या कंपनी से सम्बंधित कोई बढ़िया फंडामेंटल बदलाव होने पर कुछ दिन के लिए उस कंपनी के शेयर में ट्रेडर एक्टिव हो जाते है | इस कारण कंपनी के शेयर में लिक्विडिटी बढ़ जाती है | इस प्रकार से बढ़ी तरलता, बाहरी तरलता (external liquidity) कहा जाता है | डायवर्सिफिकेशन क्या है ?

संपत्ति की तरलता(asset liquidity)

साफ शब्दों में कहा जाय तो किसी एसेट को आप जीतनी जल्दी बेच कर कैश करा सकते है तो उस एसेट की लिक्विडिटी(liquidity) कहा जाता है | दुसरे शब्दों में कहा जाय तो जहाँ कैश का लेन-देन जीतनी आसानी से होता है उसे उसकी तरलता कहा जाता है | लिक्विडिटी को हिंदी में तरलता तथा पुराणिक शब्दावली के अनुसार इसे ‘चल निधि’ भी कहा जाता है | हर एसेट की लिक्विडिटी अलग-अलग होती है | 

जैसे – कैश भी एक प्रकार का एसेट है | कैश का लेन देन करना बहुत आसान है | इसलिए कैश की लिक्विडिटी सबसे अधिक मानी जाती है | लेकिन यदि आपके पास रियल एस्टेट के रूप में कोई एसेट है, तब इसे कैश में बदलने के लिए आपको समय देना पड़ेगा | क्योंकि आप इसे सही कीमत पर तत्काल नहीं बेच पाएंगे | ग्राहक खोजने में, तोल मोल करने में कुछ समय व्यतीत हो जायेगा, हो सकता है कि इसे बेचने के लिए आपको कई महीनो तक इंतजार भी करना पड़े | अतः इस एसेट की लिक्विडिटी कम मानी जाएगी |

अर्थात ऐसा एसेट जिसको खरीदने तथा बेचने के लिए लोग बराबर की संख्या में लाईन में खड़े रहते है तथा इनके सौदे तेज़ी से पुरे होते जाये तो उस एसेट की लिक्विडिटी अधिक मानी जाएगी |

जिस एसेट में खरीदारी करने वाले तथा बेचने वाले की संख्या बहुत कम होती है या खरीदने तथा बेचने होते तो है लेकिन इनके कीमत में अधिक फर्क होने के कारण इनका सौदा पूरा नहीं हो पाता है तो ऐसे में उस एसेट की लिक्विडिटी उस समय बहुत कम हो जाएगी | 

ऐसा कतई नहीं है कि जिस एसेट की लिक्विडिटी कम है उसकी हमेशा कम ही रहेगी | यदि भविष्य में उस एसेट में खरीदने तथा बेचने वाले के मध्य तालमेंल स्थापित हो जाता है तथा सौदे तेज़ी से पुरे होने लगते है, तब उस एसेट की लिक्विडिटी बढ़ जाएगी | म्यूचुअल फंड क्या है ?

तरल एसेट के प्रकार(Types Of Liquid Assets)

भारत में तरल एसेट के प्रकार निम्न है |

  • नगदी
  • नगदी समकक्ष
  • जमा पूँजी(Accrued Income)
  • शेयर (Stocks)
  • सरकारी बांड (Government Bonds)
  • जमा प्रमाण पत्र(Certificate of Deposits)

नकदी / कैश(Cash)

नकदी को सर्वाधिक तरल एसेट माना जाता है | कैश में किसी वस्तु के खरीदना या कैश का आदान प्रदान करना अत्यधिक आसान होता है | आप इसका प्रयोग किसी भी खरीद बिक्री में बड़ी आसानी से कर सकते है | 

नगदी समकक्ष(Cash Equivalents)

कम समय के लिए किया गया निवेश नकदी समकक्ष के अंतर्गत आता है | ये नकदी से थोडा कम तरल होता है | इसका कारण है कि जब भी आपको इस एसेट से कोई ट्रांसेक्शन करना होगा तो पहले आपको अपना निवेश तोड़ना पड़ेगा तब आप उस निवेश से मिले कैश का प्रयोग कर पाएंगे |

उपार्जित पूँजी(Accrued Income)

आपके वो आय जो आपको किसी निवेश पर प्राप्त हुआ हो उसे उपार्जित आय कहा जाता है | जैसे आपके निवेश पर मिला व्याज, आपके शेयर बाज़ार में निवेश पर मिलने वाला डिविडेंट | ये आपको डायरेक्ट कैश के रूप में नहीं मिलते है ये आपको आपके खाते में मिलता है | इस उपार्जित पूंजी को हमें बैंक से कैश निकालना पड़ेगा तत्पश्चात आप उससे खरीद विक्री कर पाएंगे | ये भी एक प्रकार से तरल पूंजी है |

शेयर (Stocks)

ये उपरोक्त तीनों से थोडा कम तरल होता है | शेयर बाज़ार में लिस्टेड कंपनियां अपने शेयर लिस्टेड करती है | किसी ब्रोकिंग कंपनी के माध्यम से आप शेयर खरीदकर अपने पोर्टफोलियों में रखते है | ये आपके लिए एक एसेट की तरह होते है | जब भी आप इस एसेट से कैश पाना चाहेंगे तब आपको शेयर बेचना होगा |

तरलता क्या है / liquidity meaning Full Details in Hindi

बेचे गए शेयर की कीमत अगले दिन आपके डीमेट खाते में वापस आ जायेगा | आपको इस पूंजी को अपने बैंक खाते ट्रांसफर करने के बाद ये आपके बैंक खाते में आ जायेगा | अब आप इसे कैश कराकर कोई भी ट्रांसेक्शन कर सकते है |

सरकारी बांड (Government Bonds)

सरकार द्वारा जारी किये गए ऋण प्रतिभूतियाँ, सरकारी बांड (Government Bonds) कहलाती है | ये बांड अत्यधिक तरल होते है तथा सरकार द्वारा संचालित होते है | ये एक प्रकार से फिक्स्ड डिपाजिट की तरह होते है | यह भी एक तरल एसेट होता है |

जमा प्रमाण पत्र(Certificate of Deposits)

बैंक तथा अन्य वित्तीय संस्थाओ में जमा किये गए पूंजी का प्रमाण पत्र को जमा प्रमाण पत्र(Certificate of Deposits) कहा जाता है | बैंक या किसी वित्तीय संस्था में पूंजी जमा करने के बाद बैंक या संस्था जमा किये गए राशि का एक प्रमाण पत्र जारी करती है जो यह दर्शाती है कि आपने उस बैंक / संस्था में कितनी धनराशि, कब तक के लिए किन शर्तो पर जमा किया है का विवरण दर्ज रहता है |

कम तरल एसेट(less liquid assets)

ऐसे एसेट जिन्हें कैश में बदलने में समय लगता है या यूँ कहा जाय की ऐसे एसेट जिनके ट्रांजेक्शन में वक्त लगता हो या आसान न हो तो ऐसे एसेट को कम तरल एसेट कहा जाता है | जैसे सोना में निवेश, रियल एस्टेट इत्यादि |

शेयर बाज़ार में तरलता(liquidity in stock market)

वैसे तो तरलता हर एसेट के लिए बड़ा महत्व रखता है लेकिन शेयर बाज़ार की दुनियाँ में आप लिक्विडिटी शब्द का प्रयोग आम तौर पर सुनते होंगे | शेयर बाज़ार एक ऐसा बाज़ार होता है जहाँ पर कंपनी के शेयर लिस्टेड होते है तथा बाज़ार खुलने के बाद ट्रेडर, शेयर की खरीद-बिक्री करना आरंभ कर देते है |

शेयर बाज़ार में तरलता(Liquidity In Stock Market)

शेयर बाज़ार में कंपनियों के शेयर लिस्टेड होते है | कंपनी के शेयर एक एसेट होते है | अतः जिस कंपनी के शेयर में ट्रेडर एक्टिव होकर खरीद बिक्री करते है उस कंपनी के शेयर प्राइस में बड़ी हलचल होती है | एक ट्रेडर ऐसे कंपनी के शेयर की तलाश करते है जिसमे तरलता अधिक होती है | अधिक लिक्विडिटी वाले कंपनी के शेयर में वोलैटिलिटी (Volatility) अधिक होती है | 

वोलैटिलिटी अधिक होने के कारण शेयर की कीमत तेज़ी से ऊपर-निचे होती रहती है | शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग करने वाले ट्रेडर को अधिक वोलैटिलिटी वाले शेयर की तलाश होती है क्यों कि ऐसे शेयर में ट्रेडर को ट्रेड का टार्गेट/स्टॉप लॉस जल्दी प्राप्त हो जाता है | पोर्टफोलियो क्या है

अधिक तरलता वाले शेयर को कैसे पहचाने?

वैसे तो शेयर बाज़ार लगभग सभी शेयरों में लिक्विडिटीअधिक पाई जाती है | इसके बाबजूद कुछ ऐसे शेयर होते है जो सामान्य से भी अधिक वोलैटाईल होते है | लेकिन हम इन्हें कैसे पहचानेगे | तो आईये आज के इस कड़ी में हम इसे समझते है |

अधिक तरलता वाली कंपनी को पहचानने का सबसे सरल उपाय है कि उस कंपनी के शेयर बाज़ार में ट्रेड हो रहे शेयर का आस्क तथा बिड का एनालिसिस करना | बिड और आस्क के एनालिसिस का अर्थ है कि कंपनी के शेयर में खरीददारी करने वाले तथा बिकवाली करने वाले ट्रेडर के मध्य अंतर देखना |

अधिक तरलता वाले शेयर को कैसे पहचाने

जिस कंपनी में बिड और आस्क का अंतर जितना कम होता है वो कंपनी उतनी ही अधिक लिक्विडिटी वाली मानी जाती है | तथा जिस कंपनी में बिड और आस्क का अंतर जितना अधिक होता है वो कंपनी उतनी ही कम तरलता वाली होती है | अतः ट्रेडर को हमेशा ऐसी कंपनी में ट्रेड करना चाहिए जिसमें आस्क तथा बिड का अंतर कम से कम हो |

शेयर बजार के चार्ट में एक वॉल्यूम नाम का इंडिकेटर होता है जो किसी भी कंपनी में ट्रेड हुए शेयरों की संख्या को दर्शाता है | जिस कंपनी वॉल्यूम के बार बहुत छोटे छोटे होते है उन शेयरों में लिक्विडिटी की कमी पाई जाती है | ठीक इसके विपरीत जिन कंपनी के चार्ट में वॉल्यूम का बार बड़े-बड़े होते है उन कंपनी में लिक्विडिटी अधिक पाई जाती है | सोते-सोते पैसे कमाए / Passive Income Ideas

शेयर बाज़ार में तरलता का महत्व

शेयर बाज़ार में तरलता का बड़ा महत्व है | ट्रेडर के लिए शेयर बाज़ार में ट्रेड करना एक बिजनेस की तरह है तथा ख़रीदे गए शेयर एक एसेट है | शेयर बाज़ार खुलने के बाद ट्रेडर अपनी टेक्निकल एनालिसिस के अनुसार शेयर में ट्रेड लेते है | जब इन्हें मुनाफा होने लगता है तब वे अपनी पोजिशन को स्क्वायर-ऑफ(square off) कर लेते है |

लेकिन यदि कोई ट्रेडर ऐसे कंपनी के शेयर में ट्रेड ले लेता है जिसमें लिक्विडिटी कम है तब ट्रेडर को अपनी पोजिशन काटने में समस्या का सामना कर पड़ सकता है | 

आईये इसे विस्तार से समझे:-

शेयर बाज़ार में कुछ ऐसे शेयर होते है जो लगातार अपर सर्किट या लोअर सर्किट में ट्रेड करते है | अपर सर्किट का अर्थ होता है कि कंपनी के शेयर में केवल खरीदार खड़े है, अपने शेयर को कोई भी बेचना नहीं चाहता हो | ठीक इसी प्रकार जब किसी कंपनी के शेयर में केवल बिकवाली हावी होती है, कोई भी खरीदारी नहीं होती है तब ऐसे में कंपनी के शेयर में लोअर सर्किट लग जाता है | 

यदि आप किसी ऐसे कंपनी के शेयर में ट्रेड ले लिए है जो सर्किट में ट्रेड करता है तब यदि कोई ट्रेड आपके एनालिसिस के विपरीत चला जायेगा तब आपको एग्जिट करने का मौका नहीं मिलेगा | लिक्विडिटी की कमी होने के कारण आप अपने सौदे को स्क्वायर-ऑफ(square off) भी नहीं कर पाएंगे | 

इस लेख से सम्बंधित प्रश्नोत्तरी:-

तरलता का क्या मतलब है?

किसी पदार्थ का वह गुण जिससे वह जीतनी आसानी से एक स्थान से दुसरे स्थान पर चला जाता है वह उस पदार्थ की तरलता कहलाती है | जैसे पानी | यदि पानी को आप एक स्थान पर बांध कर नहीं रखेंगे तब यह अपने आप एक स्थान से दुसरे स्था पर चला जायेगा | गैस भी एक तरल पदार्थ का उदाहरण है |

मुद्रा की तरलता क्या है?

कोई मुद्रा जीतनी आसानी से एक स्थान से दुसरे स्थान पर चला जाता है उसे उस मुद्रा की तरलता कहा जाता है | एक स्थान से दुसरे स्थान का अर्थ है जीतनी आसानी से
ट्रांजेक्शन होना है | जैसे कैश को सबसे तरल मुद्रा माना जाता है | क्योकि कैश से आप कोई भी खरीद बिक्री बड़ी आसानी से कर सकते है |

सरल शब्दों में तरलता क्या है?

कोई पदार्थ जीतनी आसानी से एक स्थान से दुसरे स्थान पर चला जाता है उसे उस पदार्थ की तरला कहा जाता है |

सबसे तरल मुद्रा कौन सा है?

कैश को सबसे अधिक तरल मुद्रा माना जाता है | कैश का लेन-देन करना बहुत आसान है | इसलिए कैश की लिक्विडिटी सबसे अधिक मानी जाती है | लेकिन यदि आपके पास रियल एस्टेट के रूप में कोई एसेट है, तब इसे कैश में बदलने के लिए आपको समय देना पड़ेगा | क्योंकि आप इसे सही कीमत पर तत्काल नहीं बेच पाएंगे | ग्राहक खोजने में, तोल मोल करने में कुछ समय व्यतीत हो जायेगा, हो सकता है कि इसे बेचने के लिए आपको कई महीनो तक इंतजार भी करना पड़े | अतः इस एसेट की लिक्विडिटी कम मानी जाएगी |

सारांश(Summary):-

मेरे प्रिय पाठकों आज के इस लेख तरलता क्या है / liquidity meaning full details in hindi में हम सबने तरलता क्या है, ये कितने प्रकार का होता है, के बारे में विस्तार से समझा तथा जाना कि किसी प्रकार से लिक्विडिटी का प्रयोग कर शेयर बाज़ार में या किसी भी एसेट में ट्रेड किया जा सकता है |

मै आशा करता हूँ कि तरलता से सम्बंधित यह लेख आपको पसंद आया होगा | यदि आपको यह लेख पसंद आया हो तो इसे अपने दोस्तों के साथ अवश्य शेयर करें | 

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