स्टॉप लॉस क्या है? / What is Stop Loss in Stock Market in Hindi

आप जब भी शेयर बाज़ार के बड़े-बड़े ट्रेडर की बायोग्राफी सुनते या पढ़ते होंगे तो आपने नोटिस किया होगा कि लगभग 95 प्रतिशत ट्रेडर अपने ट्रेडिंग के शुरुआती दौर में बड़े-बड़े नुकसान उठा चुके होते है | कुछ ट्रेडर तो इतने बड़े नुकसान उठाये हुए होते है कि उनकी सारी पूंजी एक ही ट्रेड लेकर चला गया होता है |

इसका एक और एक मात्र बड़ा कारण है कि ट्रेड के दौरान स्टॉप लॉस का न लगाना | ट्रेडर को गलत ट्रेड लेने पर बड़े-बड़े नुकसान  से बचाने के लिए शेयर बाज़ार में स्टॉप-लॉस का प्रयोग किया जाता है | आज के स्टॉप लॉस क्या है ? What is Stop Loss in Stock Market in Hindi अध्याय में हम अध्ययन करेंगे कि शेयर बाज़ार में स्टॉप लॉस क्या होता है, इसे कैसे लगाया जाता है, इसे लगाना क्यों आवश्यक है, इसको लगाने से क्या-क्या लाभ तथा हानि है |

Table of Contents

स्टॉप लॉस क्या है ? – What is Stop Loss

स्टॉप लॉस (Stop Loss) वह कीमत होता है जहाँ पर शेयर की कीमत पहुंचते ही ब्रोकर पोजिशन से एग्जिट कर देता है | ट्रेडर, ट्रेड लेने के बाद अपने ट्रेड को बड़े नुकसान से बचाने के लिए स्टॉप लॉस का प्रयोग करता है |

कोई भी पेशेवर ट्रेडर शेयर बाज़ार में ट्रेड लेने से पहले चार्ट का टेक्निकल एनालिसिस करता है उसके बाद वह तय करता है कि उसे ट्रेड खरीदारी में लेना है या बिकवाली में | ट्रेडर को ट्रेड लेने से पहले ट्रेड का टार्गेट तथा स्टॉप लॉस की गणना अवश्य कर लेना चाहिए | ट्रेंड लाइन (Trend Line) पैटर्न क्या होता है ?

स्टॉप लॉस क्या है ? What is Stop Loss in Stock Market in Hindi

शेयर बाज़ार हमेशा अपनी चाल में चलता हैं | यदि आपका ट्रेड बाज़ार की चाल से सटीक बैठ गया है तब आप ट्रेड में बड़ा मुनाफा कमा पाएंगे लेकिन यदि शेयर/बाज़ार आपके ट्रेड के विपरीत दिशा में चला जाये तो यह मान लेना चाहिए की आपका ट्रेड गलत था | ऐसे में यदि आप स्टॉपलॉस पहले से सेट नहीं किये रहेंगे तो मानव मनोविज्ञान के अनुसार आपको लॉस में सौदे काटना मुश्किल हो जायेगा  और आप अपना बड़ा नुकसान करा लेंगे |

इसलिए एक ट्रेडर को ट्रेड लेने से पहले ट्रेड का टार्गेट तथा स्टॉपलॉस की गणना अवश्य कर लेना चाहिए ततः ट्रेड लेने के तुरंत बाद स्टॉप लॉस को लगा लेना चाहिए | क्योंकि शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग के दौरान आप द्वारा की गयी एक छोटी सी गलती आपकी सारी पूंजी को लेकर चली जाती है | Best Small Cap Stocks to Buy Now

स्टॉप लॉस के प्रकार (Types of Stop Loss )

स्टॉप-लॉस को लगाने के आधार पर इन्हें कई वर्गो में बाँटा गया है लेकिन हम यहाँ मुख्यत 3 प्रकार के स्टॉप – लॉस की चर्चा करेंगे |

  • प्रतिशत आधारित स्टॉप लॉस 
  • सपोर्ट एंड रेजिस्टेंस पर आधारित स्टॉप लॉस 
  • पैटर्न आधारित स्टॉप लॉस

प्रतिशत आधारित स्टॉप-लॉस 

जब कोई ट्रेडर टेक्निकल एनालिसिस करने के बाद कोई ट्रेड लेता है तथा अपने रिस्क तथा रिवार्ड को प्रतिशत में गणना करता है तो इस प्रकार के ट्रेडर अपने स्टॉप लॉस को प्रतिशत के हिसाब से लगाते है | इस प्रकार के ट्रेडर स्टॉप लॉस को पूर्वानुमान से लगाते है | जो ट्रेडर ज्यादा रिस्क लेते है वे 7 से 8 प्रतिशत तक स्टॉप-लॉस लगाते है लेकिन कम रिस्की ट्रेडर 2 से 3 प्रतिशत तक स्टॉप-लॉस को लगते है | यह आपके रिस्क तथा रिवार्ड रेशियो पर निर्भर करता है |

सामान्यतः इस प्रकार के स्टॉप-लॉस को फ्यूचर & आप्शन ट्रेडिंग में अधिक प्रयोग किया जाता है | फ्यूचर एंड आप्शन में वोलिटिलिटी बहुत अधिक होता है | इसमें आपकी पूंजी एक ही दिन में खत्म भी हो सकती है तथा एक ही दिन में आपका पैसा डबल भी हो सकता है | अतः इस वोलिटिलिटी का भरपूर लाभ उठाने के लिए ट्रेडर ट्रेलिंग स्टॉप लॉस का प्रयोग करता है तथा अधिक से अधिक लाभ कमाता है |

सपोर्ट एंड रेजिस्टेंस पर आधारित स्टॉप-लॉस 

शेयर बाज़ार के उतार चढाव के कारण शेयर के चार्ट में सपोर्ट तथा रेजिस्टेंस का निर्माण स्वतः हो जाता है | ये सपोर्ट तथा रेजिस्टेंस आपको स्टॉप-लॉस लगाने में मदद करते है | जैसे यदि आप किसी कंपनी के शेयर को उसके सपोर्ट के लेवल पर खरीदते है तो आपको सपोर्ट के लेवल से थोडा निचे का स्टॉप लॉस तथा इसी प्रकार यदि आप रेजिस्टेंस लेवल पर शेयर में बिकवाली करते है तो आपको रेजिस्टेंस लेवल से थोडा ऊपर स्टॉप लॉस लगाना चाहिए | 

पैटर्न आधारित स्टॉप लॉस

जब कोई ट्रेडर, कैंडलस्टिक चार्ट पैटर्न या कैंडलस्टिक पैटर्न को आधार मानकर ट्रेड करता है तो ये पैटर्न स्वतः स्टॉप लॉस तथा टार्गेट का निर्धारण करते है | इन पैटर्न में आपको स्टॉप लॉस के लिए अलग से विचार करने की आवश्यकता नहीं पड़ती है | 

कुछ प्रमुख कैंडलस्टिक चार्ट पैटर्न :-> डबल टॉप चार्ट पैटर्न, डबल बॉटम चार्ट पैटर्न, ट्रेंड लाइन चार्ट पैटर्न, ट्रेंगल चार्ट पैटर्न, फ्लैग चार्ट पैटर्न, पताका चार्ट पैटर्न, हेड एंड शोल्डर पैटर्न, इन्वर्टेड हेड एंड शोल्डर पैटर्न, कंसोलिडेशन चार्ट पैटर्न है |

कुछ प्रमुख कैंडलस्टिक पैटर्न :-> मारुबोजू कैंडलस्टिक पैटर्न , डोजी कैंडलस्टिक पैटर्न, हैमर कैंडलस्टिक पैटर्न, शूटिंग स्टार कैंडलस्टिक पैटर्न, हैंगिंग मैंन कैंडलस्टिक पैटर्न , इन्वर्टेड हैमर कैंडलस्टिक पैटर्न, मोर्निंग स्टार कैंडलस्टिक पैटर्न, इवनिंग स्टार कैंडलस्टिक पैटर्न, पियर्सिंग कैंडलस्टिक पैटर्न, डार्क क्लाउड कवर कैंडलस्टिक पैटर्न, बुलिश एन्गाल्फिन कैंडलस्टिक पैटर्न, बेयरिश एन्गाल्फिन कैंडलस्टिक पैटर्न, बुलिश हरामी कैंडलस्टिक पैटर्न, बेयरिश हरामी कैंडलस्टिक पैटर्न है |

स्टॉप लॉस को कैसे लगाये(how to set stop loss)

किसी भी ट्रेडर को ट्रेड लेने से पहले रिस्क तथा रिवार्ड की गणना कर लेनी चाहिए | इससे यह ज्ञात हो जाता है कि आपको कितना कमाने के लिए कितना रिस्क (रिस्क रिवार्ड रेशियो) लेना पड़ेगा | ट्रेडर का टेक्निकल एनालिसिस ट्रेडर को बताता है कि उसे कहाँ पर टार्गेट तथा कहाँ पर स्टॉप-लॉस लगाना है | तो आईये अब हम समझने का प्रयास करते है कि एक ट्रेडर अपने ट्रेड के दौरान स्टॉप लॉस(Stop Loss) को कैसे लगा सकते है |

स्टॉप लॉस को लगाने के लिए हमें नीचे दिए गए कुछ बिंदु पर ध्यान देना चाहिए:-

सबसे पहले आपको अपने ब्रोकर के ट्रेडिंग प्लेटफार्म (जैसे – जेरोधा, शेयरखान, मोतीलाल ओसवाल ट्रेड, एंजेल ब्रोकिंग ऐप आदि) को खोलना होगा |

  1. अब आपको अपना पोजिशन टैब को खोलकर ख़रीदे गए शेयर में एग्जिट टैब पर क्लिक करना होगा | इसके बाद एक अलग विंडो खुलकर आ जायेगा जहाँ पर आपको स्टॉप-लॉस पर क्लिक करना होगा |
  2. इसके बाद यहाँ आपको दो वैल्यू को दर्ज करना होगा | पहला ट्रिगर प्राइस तथा दूसरा लिमिट प्राइस |
  3. आप जिस कीमत पर अपने स्टॉप-लॉस की सूचना स्टॉक एक्सचेंज को भेजना चाहते है है वो कीमत ट्रिगर प्राइस में तथा जिस लेवल पर आप स्टॉप-लॉस लगाना चाहते है उसे लिमिट प्राइस में दर्ज किया जाता है |
  4. ट्रेलिंग स्टॉप लॉस की कंडीशन में स्टॉपलॉस को शेयर की कीमत के साथ साथ बढाया जाता रहता है |
  5. स्टॉपलॉस को सेट करने के बाद ट्रेडर ख़रीदे गए शेयर पर टच कर एग्जिट बटन पर क्लिक कर ट्रेड का टार्गेट सेट किया जाता है | 

इस प्रकार से आप स्टॉप लॉस को लगाकर अपने नुकसान को कम तथा ट्रेलिंग स्टॉपलॉस को लगाकर अपने लाभ को सुरक्षित कर सकते है | स्टॉप लॉस : स्टॉक मार्केट में लाभदायक ट्रेड लेना शुरू करें |

स्टॉप लॉस की वैद्यता

सामान्यतः हम जिस दिन स्टॉप लॉस को लगाते है तो यदि स्टॉप-लॉस हिट हो गया तो ठीक लेकिन यदि स्टॉप-लॉस हिट नहीं होता है तो आपका स्टॉप-लॉस दिन के अंत में कैंसिल हो जाता है | लेकिन यदि आप अपने स्टॉप-लॉस को कई महीनों तक लगाये रखना चाहते है तो आपको GTT (Good Till Triggered) feature का प्रयोग करना चाहिए | GTT (Good Till Triggered) feature के द्वारा आप किसी भी शेयर में स्टॉप-लॉस तथा टार्गेट को कई महीने तक लगाये रख सकते है |

ट्रिगर प्राइस तथा लिमिट प्राइस(trigger price and limit price)

जैसा कि हमने जाना की स्टॉप लॉस(Stop Loss) का प्रयोग ट्रेडर अपने ट्रेड के नुकसान को सिमित करने के लिए करता है | स्टॉप-लॉस के आर्डर को लगाने के लिए हमें स्टॉप-लॉस ट्रिगर प्राइस तथा लिमिट-प्राइस दो वैल्यू को दर्ज करना पड़ता है | 

ट्रिगर प्राइस(trigger price)

जिस कीमत पर ब्रोकर, स्टॉप-लॉस लिमिट प्राइस की सूचना स्टॉक एक्सचेंज को भेजता है उसे स्टॉप-लॉस ट्रिगर प्राइस कहा जाता है |

लिमिट प्राइस (limit price)

ट्रेडर द्वारा सेट किया गया वह कीमत जिस पर वह स्टॉप-लॉस लगाना चाहता है, को लिमिट प्राइस कहा जाता है |

जब शेयर की कीमत ट्रिगर प्राइस पर पहुंचता है तो ब्रोकर इसकी सूचना एक्सचेंज को भेज देता है तथा एक्सचेंज आपके लिमिट आर्डर पर सौदा करने के लिए सौदेबाज़ को तैयार रखता है | जैसे ही शेयर की कीमत लिमिट प्राइस पर पहुंचता है तो स्टॉक एक्सचेंज सौदा पूरा कर देता है | डायवर्सिफिकेशन क्या है ?

इसे एक उदाहरण से समझने का प्रयास करते है :- 

जैसे मान लीजिये की अपने किसी कंपनी A के शेयर को 100 रुपये पर ख़रीदा है तथा आपका टेक्निकल एनालिसिस कहता है कि शेयर का टार्गेट कीमत 115 तथा स्टॉप-लॉस 94 रुपये है | इस कंडीशन में आप दो आर्डर लगायेंगे |

पहला आर्डर आप द्वारा टार्गेट का लगाया जायेगा जिसकी कीमत 115 रुपये है |

दूसरा आर्डर स्टॉप लॉस (Stop Loss) का लगायेंगे जिसकी कीमत 94 रुपये है | यह ऑर्डर लगाते समय आपको दो वैल्यू दर्ज करनी पड़ेगी | पहली वैल्यू स्टॉप-लॉस ट्रिगर प्राइस जो स्टॉपलॉस प्राइस से अधिक या बराबर हो सकता है हम यहाँ इसकी वैल्यू को 96 लेकर समझने का प्रयास करते है | तथा दूसरा वैल्यू लिमिट प्राइस का होता है जिसकी कीमत यहाँ 94 है | पब्लिक प्रोविडेंट फंड में कैसे निवेश करें ?

अब यदि आपका ट्रेड सही रहा तो शेयर की कीमत ऊपर चली जाएगी तथा 115 पर आपका टार्गेट हिट होकर सौदा पूर्ण हो जायेगा | ऐसे में आपको 15 प्रतिशत का लाभ हो जायेगा |

यदि आपका ट्रेड गलत दिशा में जायेगा तो जैसे ही शेयर की कीमत गिरकर 96 रुपये पर आ जायेगा आपका ब्रोकर इसकी सूचना स्टॉक एक्सचेंज को भेज देगा | स्टॉक एक्सचेंज आपके द्वारा ख़रीदे गए शेयर को आपके लिमिट प्राइस पर एक नया खरीदार तलाश कर तैयार रहता है | जैसे ही शेयर की कीमत और गिरकर 94 पर आती है, एक्सचेंज आपके सौदे को पूर्ण कर देता है | इस स्थिति में आपको 6 प्रतिशत का नुकसान उठाना पड़ेगा | शेयर बाज़ार में निवेश के नियम

ट्रेलिंग स्टॉप लॉस (Trailing Stop Loss)

ट्रेलिंग स्टॉप लॉस (Trailing Stop Loss) एक मूविंग स्टॉपलॉस होता है | जो शेयर के कीमत के साथ-साथ बदलता रहता है | एक ट्रेडर इसका प्रयोग तब करता है जब उसका ट्रेड सही दिशा में जा रहा होता है | ट्रेडर का ट्रेड सही दिशा में होने के कारण उसे प्रॉफिट हो रहा होता है तो ट्रेडर यह सोचता है कि उसका लाभ कम हो जाये लेकिन अब वह नुकसान में न जाये तो इस स्थिति में ट्रेडर ट्रेलिंग स्टॉप-लॉस (Trailing Stop Loss)  का प्रयोग करता है |

ट्रेलिंग स्टॉप लॉस (Trailing Stop Loss) कैसे कार्य करता है 

इसमें ट्रेडर अपने स्टॉप-लॉस को शेयर के वर्तमान कीमत से कुछ पॉइंट निचे लगाता है | ट्रेडर जितने पॉइंट का ट्रेडर ट्रेलिंग स्टॉप-लॉस सेट करता है | ट्रेडर का लाभ बढ़ने के साथ-साथ ट्रेडर, स्टॉप-लॉस को भी बढाता जाता है | एक प्रकार से कहा जाये तो ट्रेडर अपने लाभ को प्रोटेक्ट करता जाता है |

स्टॉप लॉस क्या है ? What is Stop Loss in Stock Market in Hindi

इस प्रकार ट्रेड में लाभ तो बढता जाता है लेकिन नुकसान नहीं होता है बल्कि लाभ कम होता जाता है |

इसे एक उदाहरण से समझने का प्रयास करते है :-

मान लीजिये कि आपका टेक्निकल एनालिसिस किसी कंपनी के शेयर को 200 रुपये पर खरीद कर 210 पर बेचने के साथ-साथ 195 रुपये स्टॉप-लॉस लगाने के लिए कहता है |

अब मान लेते है कि आपने यह ट्रेड ले लिया है तथा स्टॉप लॉस को 195 पर लगा लिया लेकिन टार्गेट नहीं लगाया | अब यदि शेयर की चाल आपके ट्रेड के विपरीत जायेगा तो आपका स्टॉप-लॉस कट जायेगा तथा आपको इस ट्रेड में नुकसान हो जायेगा |

लेकिन यदि शेयर की चाल आपके ट्रेड के अनुसार रहा तो शेयर की कीमत ऊपर जायेगा तथा शेयर की कीमत 210 के पास पहुच जायेगा | अब इस स्थिति में या तो आप अपना लाभ बुक कर ट्रेड से बाहर आ जायेंगे या तो आप और लाभ बढ़ाने के इरादे से थोडा इंतज़ार करेंगे | यदि आप ट्रेड में लाभ बुक कर बाहर आ गए तो ठीक है लेकिन यदि आप और लाभ के लिए थोडा इंतज़ार करना चाहते है तो यहाँ ट्रेलिंग स्टॉप-लॉस काम आता है | शेयर खरीदने और बेचने का उत्तम समय ?

अब मान लीजिये की आप स्टॉप-लॉस को बढाकर 205 पर लगा देते है, इस समय शेयर की कीमत 210 पर ट्रेड कर रहा है | अब यदि यहाँ से शेयर की कीमत में तेज़ी आ जाती है तथा शेयर की कीमत बढकर 215 पर चली जाती है तो ऐसे में ट्रेडर अपना स्टॉप लॉस को बढाकर 210 पर लगा देगा | यदि फिर से शेयर में तेज़ी आती है जिस कारण से शेयर की कीमत बढ़कर 217 पहुँच जाती है तो ट्रेडर अपना स्टॉप-लॉस को 212 पर लगा लेता है 

इसका लाभ यह होता है की यदि यहाँ से बाज़ार में तेज़ बिकवाली भी आ जाये तो ट्रेडर का लाभ सुरक्षित रहता है तथा ट्रेडर के प्रॉफिट में ही स्टॉप लॉस कट जाता है | ट्रेलिंग स्टॉप-लॉस का प्रयोग फ्यूचर तथा आप्शन ट्रेडिंग में ज्यादातर किया जाता है क्योंकि फ्यूचर तथा आप्शन में वोलिटिलिटी अधिक होता है | एडवांस/डिक्लाइन रेशियो

स्टॉप लॉस लगाने के लाभ(Benefits of stop loss)

शेयर बाज़ार में ट्रेडर को स्टॉप लॉस लगाने के जहाँ अनेकों लाभ होते है, तो वही कुछ हानियाँ भी है |

स्टॉप लॉस क्या है ? What is Stop Loss in Stock Market in Hindi

तो आईये अब हम स्टॉप लॉस को लगाने के लाभ(Advantage) के बारे में समझते है |

  • यह आपके रिस्क मैनेजमेंट को बेहतर बनता है |
  • यह ट्रेडिंग में आपको बड़े नुकसान से बचाता है |
  • स्टॉप लॉस तथा टार्गेट लगाने के बाद आपको बार-बार डिस्प्ले पर समय नहीं देना पड़ता है 
  • इसके लगाने का ब्रोकर द्वारा कोई अलग से चार्ज नहीं किया जाता है 
  • स्टॉप-लॉस तथा टार्गेट लगा कर इंतजार करने से ट्रेडर में स्थिरता/धैर्य का विकास होता है |
  • स्टॉप लगाने से आप बाज़ार पर अपने भावनाओ को हावी नहीं होने देते है |

स्टॉप लॉस लगाने के हानि(Disadvantages of stop loss)

स्टॉप लॉस का प्रयोग आम तौर पर इंट्रा-डे ट्रेडिंग में किया जाता है | कभी-कभी बाज़ार के उतार-चढाव के कारण शेयर स्टॉप-लॉस को हिट कर देता है | उसके बाद शेयर ट्रेडर के ट्रेड दिशा में अपनी चाल चलता है लेकिन ट्रेडर का स्टॉप-लॉस कट जाने के कारण अब वो ट्रेड से बाहर हो गए होते है | शेयर बाज़ार में बिना नुकसान के लगातार कमाई कैसे करें(Book)

इस लेख से सम्बंधित प्रश्नोत्तरी

स्टॉप लॉस क्या है ?

स्टॉप लॉस वह प्राइस होता है जिस पर ट्रेडर का ट्रेड गलत जाने पर वह अपने सौदे को नुकसान में काट लेता है | स्टॉप लॉस आर्डर ट्रेडर को बड़े-बड़े नुकसान से बचाता है | दरअसल ट्रेड लेने से पहले ट्रेडर अपने रिस्क तथा रिवार्ड रेशियो के अनुसार अपने नुकसान की गणना कर लेता है |

स्टॉप लॉस क्या है उदाहरण सहित?

ट्रेडर, ट्रेड लेने के बाद अपने ट्रेड को बड़े नुकसान से बचाने के लिए स्टॉप लॉस(Stop Loss) का प्रयोग करता है | एक नियमित ट्रेडर ट्रेड लेने से पहले ट्रेड के संभावित नुकसान तथा टार्गेट की गणना कर लेता है | जैसे यदि आपने किसी शेयर को 100 रुपये पर इस इरादे से ख़रीदा है कि शेयर को 110 पर बेच कर अपना लाभ बुक करूँगा | लेकिन यदि शेयर आपके ट्रेड की दिशा में नहीं चले तो आप अधिकतम नुकसान प्रति शेयर 5 रुपये का उठा सकते हो तो आपका स्टॉप लॉस 100-5 = 95 रुपये होगा |

स्टॉप लॉस का उपयोग कैसे करें?

स्टॉप लॉस का उपयोग आप शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग के दौरान अपने नुकसान को कम करने के लिए कर सकते है | शेयर बाज़ार में शेयर हमेशा अपनी चाल में चलते है | यदि आपका ट्रेड शेयर के चाल की दिशा में है तो आप लाभ कमाएंगे अन्यथा की दशा में आप अपना नुकसान करा लेंगे | और यदि आप स्टॉप लॉस नहीं लगायेंगे तो आप अपना बड़ा नुकसान करा कर सारी पूंजी गवां देंगे | इसलिए ट्रेडर को स्टॉप लॉस लगाना अत्यंत आवश्यक होता है |

शेयर मार्केट में स्टॉप लॉस कैसे लगाए?

आप ख़रीदे/बेचे गए जिस भी शेयर में स्टॉप लॉस लगाना चाहते है उसके एग्जिट के बटन पर तब करे | उसके बाद एक नया टैब खुलकर आ जायेगा | इस तब में स्टॉप लॉस पर क्लीक कर करें | इसके बाद यहाँ आपको दो वैल्यू को दर्ज करना होगा | पहला ट्रिगर प्राइस तथा दूसरा लिमिट प्राइस |
आप जिस कीमत पर अपने स्टॉप-लॉस की सूचना स्टॉक एक्सचेंज को भेजना चाहते है वो कीमत ट्रिगर प्राइस में तथा जिस लेवल पर आप स्टॉप-लॉस लगाना चाहते है उसे लिमिट प्राइस में दर्ज किया जाता है | आप ये वैल्यू कर दर्ज कर सबमिट कर अपना स्टॉप लॉस लगा सकते है |

स्टॉप लॉस अगले दिन काम करता है?

जी हाँ महोदय बिलकुल | यदि आप खरीदे गए शेयर पर एग्जिट टैब पर क्लीक कर सामान्य तरीके से स्टॉप लॉस को लगायेंगे तो यदि स्टॉप लॉस हिट नहीं हुआ तो आपका स्टॉप लॉस आर्डर उसी दिन के अंत में कैंसिल हो जायेगा |
लेकिन यदि आप इसी स्टॉप लॉस को GTT (Good Till Triggered) feature का प्रयोग कर लगायेंगे तो आप इसे कई महीनो तक लगाये रख सकते है |

सारांश (Summary)

दोस्तों आज स्टॉप लॉस क्या है ? What is Stop Loss in Stock Market in Hindi के इस अध्याय में हम सबने स्टॉप लॉस को कैसे लगते है ,इसका प्रयोग ट्रेड के दौरान कैसे करते है, इसके क्या-क्या लाभ तथा हानि है, के बारे में विस्तार से अध्ययन किया | फिर भी यदि आपके मन में किसी प्रकार का सवाल हो तो आप हमें कमेन्ट करें या आप हमारे मेल आई.डी. contact@finohindi.com पर हमें मेल कर सकते है | 

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हेल्लो दोस्तों, मै पिछले 8 वर्षो से शेयर बाज़ार में निवेश तथा रिसर्च कर रहा हूँ | मै अपने अनुभव को Finohindi के माध्यम से आपके साथ सच्चाई के साथ सीधे तथा साफ शब्दों में बाटना चाहता हूँ | यदि आप शेयर बाज़ार में निवेश, ट्रेड करते है या आपकी शेयर बाज़ार में रूचि है तो आप सही जगह पर है

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