ट्रेडिंग क्या है / Trading Kya hai? Full Detail in Hindi

आपने कभी न कभी शेयर बाज़ार(stock market) में ट्रेडिंग(trading) शब्द तो सुना ही होगा | आईये आज ट्रेडिंग क्या है / Trading Kya hai ? Full Detail in Hindi के इस आर्टिकल में यह जानते है कि ट्रेडिंग क्या होती है, तथा स्टॉक ट्रेडिंग क्या होती है, यह कितने प्रकार का होता है, के साथ – साथ ट्रेडिंग से होने वाले लाभ तथा हानि को विस्तार से जानेंगे |

Table of Contents

ट्रेडिंग क्या है / Trading Kya hai

किसी भी वस्तु की खरीद-बिक्री करना ट्रेडिंग कहलाता है | लेकिन जब खरीद-बिक्री शेयरों का किया जाय तो इसे स्टॉक ट्रेडिंग कहते है | कोई भी ट्रेडर लाभ कमाने के इरादे से ट्रेडिंग करता है, जिसमें यह किसी कंपनी के शेयर को कम कीमत में खरीद कर अधिक कीमत में बेचने का प्रयास करता है | यही ट्रेडर का लाभ होता है | Stock market – शेयर बाज़ार क्या है ?

उदाहरण

मान लीजिये कोई कंपनी A है तथा इसके एक शेयर की कीमत 50 रुपये है | ट्रेडर को लगता है कि शेयर की कीमत ऊपर जाने वाली है, तो ट्रेडर, कंपनी A के शेयर को खरीद लेगी |

ट्रेडिंग क्या है / Trading Kya hai  ? Full Detail in Hindi

कुछ समय बाद कंपनी A का शेयर 52 हो जाता है | अब ट्रेडर को लगता है कि उसे शेयर बेच देने पर पयाप्त लाभ मिल जायेगा, तो ट्रेडर कंपनी A के शेयर को बेच देगा | यदि ट्रेडर ने 1000 शेयरों की खरीद-बिक्री की तो

ट्रेडर का लाभ = 1000*52 – 1000*50 = 2000 रूपया

लेकिन ऐसा हर बार नहीं होता कि शेयर खरीदने के बाद कीमत ऊपर ही जाये | कई बार शेयर खरीदने के बाद शेयर का कीमत गिर जाता है जिससे ट्रेडर को नुकसान उठाना पड़ता है |

स्टॉक ट्रेडिंग के प्रकार

  • स्केप्लिंग ट्रेडिंग (Scalping trading)
  • मार्जिन ट्रेडिंग (Margin trading)
  • मूहूर्त ट्रेडिंग (Auspicioustrading)
  • एल्गो ट्रेडिंग (Algo trading)
  • डिलीवरी ट्रेडिंग (Delivery Trading)
  • पोजीशनल ट्रेडिंग (Positional trading)
  • स्विंग ट्रेडिंग (Swing Trading)
  • इंट्राडे ट्रेडिंग (Intraday Trading)
  • ऑप्शन ट्रेडिंग (Option Trading)

1) स्केप्लिंग ट्रेडिंग (Scalping Trading)

छोटे टाइम फ्रेम पर, बहुत कम समय में बड़ी मात्रा में किया गया ट्रेड, स्केप्लिंग ट्रेडिंग कहलाता है | एक स्केप्लिंग ट्रेडर 1 मिनट से 5 मिनट के भीतर अपने सौदे को पूर्ण कर लेता है | इस ट्रेडिंग में अधिक पूंजी की आवश्यकता पड़ती है |

2) मार्जिन ट्रेडिंग (Margin trading )

जब ट्रेडर किसी कंपनी के शेयर को खरीदने के लिए मार्जिन का प्रयोग करता है, तो इस प्रकार की ट्रेडिंग को मार्जिन ट्रेडिंग कहते है |

स्टॉक ट्रेडिंग के प्रकार

जब किसी ट्रेडर के पास पूंजी की कमी होती है तो कई ब्रोकर कुछ शर्तों पर डीमेट खाते में उपलब्ध पूंजी से कई गुना शेयर खरीदने की अनुमति देती है | मार्जिन ट्रेडर ब्रोकर की इसी सुविधा का लाभ उठाकर ट्रेडिंग करते है |

3) मूहूर्त ट्रेडिंग (Auspicious Trading )

किसी शुभ मुहूर्त में की जाने वाली ट्रेडिंग को मुहूर्त ट्रेडिंग कहा जाता है| बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंजने मुहूर्त ट्रेडिंग की परंपरा वर्ष 1957 में तथा नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ने वर्ष 1992 शुरू की । व्यापारिक समुदाय के अनुसार दीवाली के अवसर पर मुहूर्त व्यापार को शुभ माना जाता है. इसलिए आम तौर पर दिवाली के दिन शाम को मुहूर्त ट्रेडिंग हेतु शेयर बाज़ार खुला रहता है |

4) एल्गो ट्रेडिंग (Algo Trading)

जब ट्रेडिंग किसी व्यक्ति द्वारा न करके कम्प्यूटर के algorithms तथा software के द्वारा स्वत संचालित होती है तो इस प्रकार के ट्रेडिंग को एल्गो ट्रेडिंग कहा जाता है | इस ट्रेडिंग को ब्लैक-बॉक्स ट्रेडिंग भी कहा जाता है |

5) डिलीवरी ट्रेडिंग (Delivery trading)

यह ट्रेडिंग का सबसे सुरक्षित ट्रेडिंग माना जाता है | इसमे ट्रेडर कम्पनी के शेयर को एक वर्ष से अधिक समय तक अपने डीमेट खाते में रखता है तथा शेयर की कीमत बढ़ जाने पर बेच कर मुनाफा बुक कर लेता है | इस प्रकार की ट्रेडिंग के लिए ट्रेडर अच्छे फंडामेंटल तथा कंपनी के साथ चार्ट का अध्यन करने के पश्चात् ही ट्रेडिंग करता है |

6) पोजीशनल ट्रेडिंग (Positional trading)

जब ट्रेडर ख़रीदे गए शेयर को एक माह से अधिक तथा अधिकतम एक वर्ष तक अपने डीमेट खाते में रखता है तो इस प्रकार के ट्रेडिंग को पोजीशनल ट्रेडिंग कहा जाता है | इस प्रकार के ट्रेडर को एक वर्ष की भीतर लाभ/हानि में अपने सौदे को काटना पड़ता है |

7) स्विंग ट्रेडिंग (Swing Trading)

जब ट्रेडर ख़रीदे गए शेयर को एक दिन से अधिक तथा एक माह से कम समय में लाभ/हानि बुक कर लेता है तो इस प्रकार के ट्रेडर को स्विंग ट्रेडिंग कहते है | स्विंग ट्रेडर शेयर के कीमतों में स्विंग का लाभ उठाते है | स्विंग ट्रेडर्स प्रायः हेड एंड शोल्डर्स पैटर्न, फ्लैग पैटर्न, कप और हैंडल पैटर्न तथा ट्रायंगल पैटर्न उपयोग करते हैं |

8) इंट्राडे ट्रेडिंग (Intraday Trading):

जब ट्रेडर ख़रीदे गए शेयर को एक दिन से अधिक होल्ड नही करता है तथा दिन भर में ही अपने सौदे को काट कर लाभ/हानि बुक कर लेता है तो इस प्रकार के ट्रेडर को इंट्रा-डे ट्रेडर कहा जाता है तथा इस प्रकार की तकनीक को इंट्रा-डे ट्रेडिंग कहा जाता है | इंट्राडे ट्रेडिंग क्या है?

9) ऑप्शन ट्रेडिंग (Option Trading)

फ्यूचर & ऑप्शन सेगमेंट में कॉल तथा पुट की खरीद बिक्री करना ही ऑप्शन ट्रेडिंग कहलाता है | यह अत्यंत जोखिम भरा ट्रेडिंग होता है | इसमे कुछ ही समय में लाखो का लाभ तथा अगले ही क्षण में हानि हो सकती है | ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट साप्ताहिक तथा मंथली होता है जो अपने निर्धारित तिथि को एक्सपायर हो जाती है | शेयर बाज़ार में कभी भी उधार ,लोन के पैसे से ट्रेडिंग नहीं करना चाहिए |

ट्रेडिंग के फायदे और नुकसान

ट्रेडिंग से क्या लाभ है? – Advantages of trading in hindi

  • ट्रेडिंग द्वारा आप कम समय में ज्यादा पैसा कमा सकते हैं |
  • ट्रेडिंग करने के लिए आपको घर से बाहर जाने की आवश्यकता नहीं होती है |
  • ट्रेडिंग करने के लिए आपको किसी प्रकार की डिग्री की आवश्यकता नहीं होती है |
  • ट्रेडिंग करने के लिए आपको कोई बाध्य नहीं कर सकता | आप अपनी मर्जी के मालिक होते है |
  • आप घर बैठे अपने कम्प्यूटर/मोबाइल से ट्रेडिंग करके दिन का हजारों/लाखों रुपए कमा सकते हैं |
  • Trading में आपका नुकसान केवल उतना ही है जितना आप capital लगा रहे हैं जबकि प्रॉफिट अनलिमिटेड है |
  • सपोर्ट तथा रजिस्टेंस को आधार मानकर आसानी से ट्रेडिंग की जा सकती है | किसी बड़े रिसर्च की आवश्यकता नहीं होती है |

ट्रेडिंग (Trading) क्या है ? Full Detail in Hindi

ट्रेडिंग के नुकसान क्या है? – Disadvantages of trading in hindi

  • अगर आप ट्रेडिंग करते समय स्टॉप लॉस नहीं लगाते है तो आपका लाखों रुपए की पूंजी कुछ ही समय में खत्म हो सकता है।
  • आपके पास जीतनी पूंजी है उतने से ही ट्रेड करें | margin लेकर ट्रेडिंग करने पर आपका risk और भी ज्यादा बढ़ जाता है।
  • कुछ लोग बिना किसी ट्रेड के ट्रेड ले लेते है और अपने नुकसान करा लेते है |

ज्यादातर ट्रेडर बिना ट्रेडिंग सीखे ट्रेडिंग करना आरंभ कर देतें है जिससे वे अपना नुकसान कर बैठते है ।

ट्रेडिंग और निवेश(Investing) में क्या अंतर है?

  • ट्रेडिंग में आपको केवल टेक्निकल एनालिसिस पर फोकस करना पड़ता है जबकि इन्वेस्टिंग(निवेश) में टेक्निकल के साथ फंडामेंटल एनालिसिस पर भी फोकस करना आवश्यक होता है 
  • ट्रेडिंग में कैंडलस्टिक चार्टप्राइस-एक्शन और सपोर्ट रेजिस्टेंस देखना आवश्यक होता है, जबकि इन्वेस्टिंग (investing) में कंपनी का बिजनेस मॉडल तथा कंपनी का प्रॉफिट के साथ कंपनी के लॉन्गटाइम का चार्ट देखना जरूरी होता है।
  • ट्रेडिंग में शेयर की price history चेक करना पड़ता है जबकि इन्वेस्ट में कंपनी का पास्ट परफॉर्मेंस चेक करना पड़ता है ।
  • Trading से short term में पैसा कमाया जाता है जबकि निवेश से long term में |
  • ट्रेडिंग में ब्रोकरेज शुल्क अधिक होता है जबकि इन्वेस्टिंग में ब्रोकरेज शुल्क कम होता है |
  • Trading में कम समय में बहुत ज्यादा पैसा कमाई कर सकते हैं। जबकि इन्वेस्टिंग में अधिक समय लगता है |
  • ट्रेडिंग में आपको मार्जिन मिल जाता है जिससे आप कम पूंजी में अधिक ट्रेड कर सकते है जबकि इन्वेस्टिंग में शेयर की पूरी कीमत देनी पड़ती है अतः अधिक पूंजी की अवश्यकता पड़ती है |

इस लेख से सम्बंधित प्रश्नोत्तरी

ट्रेडिंग का क्या मतलब होता है?

कोई भी व्यक्ति जब बाज़ार से किसी वस्तु या शेयर का खरीद बिक्री कर लाभ कमाता है तो इन्हें ट्रेडर कहा जाता है | लाभ कमाने के लिए खरीद बिक्री करने वाली प्रक्रिया को ट्रेडिंग कहा जाता है |

ट्रेडिंग करना कैसे सीखें?

शेयर बाज़ार में शेयर की खरीद बिक्री करने वाले व्यक्ति को ट्रेडर तथा इस प्रक्रिया को ट्रेडिंग कहा जाता है | ट्रेडिंग सिखने के लिए सबसे पहले आपको पेपर ट्रेडिंग का अभ्यास करना चाहिए | यदि पेपर ट्रेडिंग में आपको 80 प्रतिशत से अधिक में लाभ हो तो कैश मार्केट में कम पूंजी के साथ ट्रेडिंग की शुरुआत करना चाहिए | कम पूंजी से ट्रेडिंग की शुरुआत करने से आपकी लर्निंग तथा अर्निंग दोनों होती रहेगी |

ट्रेडिंग करना सही है क्या?

यदि आप टेक्निकल एनालिसिस के साथ ट्रेडिंग के गुर को अच्छे से सीख कर ट्रेडिंग कर रहे है तो आपके लिए ट्रेडिंग सही है | लेकिन यदि आप शेयर बाज़ार के लिए नए है | तथा आपने ट्रेडिंग के गुर , ट्रेडिंग के नियम तथा टेक्निकल एनालिसिस का अध्ययन नहीं किया है तो ट्रेडिंग आपके लिए सही नहीं है |
ट्रेडिंग बहुत ही खतरनाक होता है | यदि आप अच्छे से ट्रेडिंग को समझ कर ट्रेडिंग कर रहें है तो आप मालामाल हो सकते है, लेकिन यदि आप बिना ट्रेडिंग को सीखे ट्रेडिंग करेंगे तो आपको कंगाल होने में देर नहीं लगेगी |

इंट्रा डे ट्रेडिंग कैसे करें?

इंट्रा डे ट्रेडिंग के लिए सबसे पहले आपको ऐसे शेयर की तलाश करनी होती है जिसमे तरलता(वोलिटिलिटी) अधिक होती है | इसके बाद शेयर के चार्ट को एक घंटे या उससे कम के टाइम फ्रेम में सेट कर टेक्निकल एनालिसिस, चार्ट पैटर्न, के साथ साथ रिस्क रिवार्ड रेशियो का अध्ययन कर ट्रेडिंग किया जा सकता है |

आज हमने जाना (Today We Learned)

दोस्तों आज ट्रेडिंग क्या है / Trading Kya hai ? Full Detail in Hindi के इस लेख में हमने जाना कि शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग किसे कहते है, यह कितने प्रकार का होता है ट्रेडिंग के फायदे तथा नुकसान क्या-क्या है, ट्रेडिंग तथा निवेश में क्या फर्क होता है, के बारे में विस्तार से अध्ययन किया |

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हेल्लो दोस्तों, मै पिछले 8 वर्षो से शेयर बाज़ार में निवेश तथा रिसर्च कर रहा हूँ | मै अपने अनुभव को Finohindi के माध्यम से आपके साथ सच्चाई के साथ सीधे तथा साफ शब्दों में बाटना चाहता हूँ | यदि आप शेयर बाज़ार में निवेश, ट्रेड करते है या आपकी शेयर बाज़ार में रूचि है तो आप सही जगह पर है

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