बुलिश हरामी कैंडलस्टिक पैटर्न / Bullish Harami Candlestick Pattern Full Details In Hindi

मेरे प्रिय पाठकों कुछ अध्याय में हम सब डबल कैंडलस्टिक पैटर्न के पियर्सिंग कैंडल स्टिक पैटर्न, डार्क क्लाउड कवर कैंडल स्टिक पैटर्न, बुलिश एन्गल्फिंग कैंडलस्टिक पैटर्न, बेयरिश एन्गल्फिंग कैंडल स्टिक पैटर्न को विस्तार से पढ़ा | अब आज के इस लेख में हम डबल कैंडलस्टिक पैटर्न के एक और कैंडल स्टिक पैटर्न के बारे में विस्तार से जानेंगे जिसका नाम है बुलिश हरामी कैंडलस्टिक पैटर्न |

आज के इस लेख बुलिश हरामी कैंडलस्टिक पैटर्न(Bullish Harami Candlestick Pattern) Full Details In Hindi में हम सब बुलिश हरामी कैंडलस्टिक पैटर्न(Bullish Harami Candlestick Pattern) को विस्तार से जानेंगे | आज के इस लेख में हम जानेंगे कि बुलिश हरामी कैंडलस्टिक पैटर्न क्या है, इसका आकार कैसा होता है, इसका निर्माण कहाँ होता तथा इस पैटर्न के पीछे ट्रेडर की सायकोलॉजी क्या होती है | इसके अलावा हम जानेंगे कि एक ट्रेडर को इस पैटर्न में इंट्री कब लेना चाहिए तथा टार्गेट, स्टॉप लॉस कहाँ लगाना चाहिए |

बुलिश हरामी कैंडलस्टिक पैटर्न को समझने से पहले हम समझते है कि बुलिश हरामी कैंडल किसे कहा जाता है |

बुलिश हरामी कैंडल / Bullish Harami Candle

चूँकि यह पैटर्न डबल कैंडल स्टिक पैटर्न है अतःबुलिश हरामी कैंडल / Bullish Harami Candle का निर्माण दो कैंडल के मिलने से होता है | इसमें पहला कैंडल, बड़ी बेयरिश कैंडल होती है तथा दूसरी कैंडल, बुलिश कैंडल होती है | इस कैंडल के निर्माण में दोनों कैंडल का सही रंग में होना अत्यंत आवश्यक है |

बुलिश हरामी कैंडल / Bullish Harami Candle

यदि दूसरी कैंडल गैप डाउन ओपन नहीं होती है तथा पहली बेयरिश कैंडल को 50 प्रतिशत या इससे कम तक कवर कर लेती है तब इन दोनों कैंडल को संयुक्त रूप से बुलिश हरामी कैंडल / Bullish Harami Candle कहा जाता है | यह एक बुलिश ट्रेंड रिवर्शल पैटर्न है, जो डाउन ट्रेंड में चल रहे शेयर या इंडेक्स को अपट्रेंड में बदल जाने का संकेत देता है | इस कैंडल का निर्माण सामान्यतः चार्ट के बॉटम पर या सपोर्ट के लेवल पर होता है |

बुलिश हरामी कैंडल / Bullish Harami Candle की विशेषताए:-

  • बुलिश हरामी कैंडल / Bullish Harami Candle कैंडल का निर्माण दो कैंडल के मिलने से होता है |
  • इसमें पहले कैंडल का बेयरिश तथा दूसरी कैंडल बुलिश होना अत्यंत आवश्यक है |
  • बुलिश हरामी कैंडल में दूसरी बुलिश कैंडल, पहली बेयरिश कैंडल को 50 प्रतिशत या उससे कम, तक कवर कर लेती है |
  • इस कैंडल में दूसरी कैंडल गैप डाउन ओपन नही होती है |
  • बेयरिश कैंडल का low ही बुलिश हरामी कैंडल / Bullish Harami Candle का low होता है |
  • जब इस कैंडल का निर्माण डाउन ट्रेंड में चल रहे शेयर के बॉटम पर हो जाता है तब इसे बुलिश हरामी कैंडलस्टिक पैटर्न / Bullish Harami Candlestick Pattern कहा जाता है |

बुलिश हरामी कैंडलस्टिक पैटर्न / Bullish Harami Candlestick Pattern Full details in hindi

जब किसी बुलिश हरामी कैंडल / Bullish Harami Candle का निर्माण डाउन ट्रेंड में चल रहे किसी शेयर के बॉटम पर होता है तब इस प्रकार से बनने वाले कैंडलस्टिक पैटर्न को बुलिश हरामी कैंडलस्टिक पैटर्न(Bullish Harami Candlestick Pattern) कहा जाता है | जब इस कैंडल का निर्माण ट्रेंड के टॉप पर होता है या बिना किसी ट्रेंड के कही भी होता है तब इसे बुलिश हरामी कैंडलस्टिक पैटर्न नहीं कहा जायेगा |

चूँकि बुलिश हरामी कैंडलस्टिक पैटर्न एक बुलिश पैटर्न है जो डाउन ट्रेंड में चल रहे शेयर को अपट्रेंड में बदल जाने का संकेत देता है | इस कारण से इसे बुलिश ट्रेंड रिवर्शल पैटर्न भी कहा जाता है | इस कैंडल का निर्माण डाउन ट्रेंड के बॉटम पर या सपोर्ट के लेवल के आस-पास होता है | प्राइस एक्शन ट्रेडिंग क्या है ?

बुलिश हरामी कैंडलस्टिक पैटर्न(Bullish Harami Candlestick Pattern) के निर्माण की सायकोलॉजी:-

जब किसी कंपनी का शेयर लगातार डाउनट्रेंड में ट्रेड कर रहा होता है तब लोग डरे हुए होते है तथा कंपनी के शेयर में लगातार बिकवाली करते जाते है | ऐसे में एक दौर ऐसा भी आता है जब कंपनी का शेयर अंडर वैल्यूड हो जाती है इस कारण ट्रेडर तथा निवेशक खरीदारी के मौके की तलाश करने लगते है | ऐसे में जब कंपनी का शेयर ओवरसोल्ड हो जाता है तब निवेशक खरीदारी करना आरंभ कर देते है |

बुलिश हरामी कैंडलस्टिक पैटर्न के निर्माण में ट्रेडर की यही सायकोलॉजी कार्य करती है | जब कंपनी का शेयर डाउन ट्रेंड में ट्रेड करते-करते अंडर वैल्यूड या ओवरसोल्ड हो जाती है तब ट्रेडर तथा निवेशक खरीदारी के मौके तलाशने लगते है |

ऐसे में जब किसी दिन ट्रेडर बिकवाली कर देते है तब शेयर की कीमत बेयरिश कैंडल बनाकर निचे चली जाती है तब इंतजार कर रहे ट्रेडर तथा निवेशक को खरीदारी का मौका मिल जाता है | ऐसे में ट्रेडर अगले दिन खरीदारी करना आरम्भ कर देते है | 

ट्रेडर/निवेशक के खरीदारी के कारण अगली कैंडल बेयरिश न होकर बुलिश कैंडल बन जाती है तथा पिछली बेयरिश कैंडल को अधिकतम 50 प्रतिशत तक कवर कर लेती है | इस प्रकार चार्ट में बुलिश हरामी कैंडलस्टिक पैटर्न (Bullish Harami Candlestick Pattern) का निर्माण हो जाता है | डायवर्सिफिकेशन क्या है ?

बुलिश हरामी कैंडलस्टिक पैटर्न(Bullish Harami Candlestick Pattern) में ट्रेड कब लें?

बुलिश हरामी कैंडलस्टिक पैटर्न(Bullish Harami Candlestick Pattern) के निर्माण हो जाने के बाद ट्रेडर को तेज़ी के ट्रेंड की शुरुआती संकेत तो मिल जाता है लेकिन ट्रेडर को ट्रेड के लिए कन्फर्मेशन का इंतजार करना आवश्यक होता है | इस पैटर्न के पूर्ण हो जाने के बाद ट्रेडर को एक ऐसे बुलिश कैंडल का इंतजार करना चाहिए जो बुलिश हरामी कैंडल के low को ब्रेक न करें | यदि बुलिश हरामी कैंडलस्टिक पैटर्न के बाद इस प्रकार के किसी बुलिश कैंडल का निर्माण हो जाता है तब इस पैटर्न को कन्फर्म पैटर्न मान लिया जाता है तथा इस बुलिश कैंडल को पैटर्न कन्फर्मेशन कैंडल कहा जाता है | 

बुलिश हरामी कैंडलस्टिक पैटर्न(Bullish Harami Candlestick Pattern) में ट्रेड कब लें?

जैसे ही अगली कैंडल, इस पैटर्न कन्फर्मेशन कैंडल का हाई ब्रेक कर ऊपर निकल जाती है वैसे ही ट्रेडर खरीदारी में ट्रेड ले लेते है | यह कैंडल जिस लेवल पर पैटर्न कन्फर्मेशन कैंडल का हाई ब्रेक करती है उस लेवल को एंट्री का लेवल कहा जाता है | पैटर्न कन्फर्मेशन कैंडल का हाई ब्रेक कर ऊपर जाने वाली कैंडल को एंट्री कन्फर्मेशन कैंडल कहा जाता है |

बुलिश हरामी कैंडलस्टिक पैटर्न में टार्गेट कहाँ सेट करें?

एक समझदार ट्रेडर, ट्रेड लेने के तुरंत बाद टार्गेट तथा स्टॉप लॉस लगाते है | इस पैटर्न में ट्रेडर अपना टार्गेट एंट्री लेवल से बुलिश हरामी कैंडल के low के अंतर जितना एंट्री पॉइंट से ऊपर लगाते है |

आईये इस पैटर्न के टार्गेट को हम एक उदाहरण से समझने का प्रयास करते है:-

इस उदाहरण को समझने के लिए हम मान लेते है कि बुलिश हरामी कैंडल का low 600 रुपये के लेवल पर है | अब हम मान कर चलते है कि इसके बाद बनने वाली पैटर्न कन्फर्मेशन कैंडल का हाई 625 तथा low 619 रुपये के लेवल पर है | 

अब हम मान लेते है कि चौथी, ट्रेड में एंट्री कन्फर्मेशन कैंडल, पैटर्न कन्फर्मेशन कैंडल के हाई(625) को ब्रेक आउट कर ऊपर आ जाती है, तब ट्रेडर के खरीदारी में ट्रेड लेने के बाद

ट्रेडर का टार्गेट = ट्रेड में एंट्री का लेवल + (ट्रेड में एंट्री का लेवल – बुलिश हरामी कैंडल)

ट्रेडर का टार्गेट = 625 + (625 – 600)

ट्रेडर का टार्गेट = 625 + 25

ट्रेडर का टार्गेट = 650 रुपये |

अतः इस स्थिति में ट्रेडर अपना टार्गेट 650 रुपये पर लगायेंगे |

टार्गेट बड़ा कैसे करें?

यदि आप पैटर्न के अनुसार 1:1 का टार्गेट लेकर एग्जिट होना चाहते है तो आप उपरोक्त उदाहरण के अनुसार एग्जिट हो सकते है | लेकिन यदि आप अपने ट्रेड के टार्गेट को बड़ा करना चाहते है तब आपको एग्जिट नहीं करना चाहिए तथा टार्गेट भी सेट नहीं करना चाहिए |

ऐसे ट्रेडर केवल स्टॉप लॉस लगाकर चार्ट के छोटे टाइम फ्रेम में किसी ट्रेंड रिवर्शल पैटर्न की तलाश करते है | जैसे ही छोटे टाइम फ्रेम पर किसी ट्रेंड रिवर्शल पैटर्न दिखाई देता है, ट्रेडर वही पर एग्जिट कर लेता है | ट्रेडर का टार्गेट जैसे-जैसे बड़ा बनता जाता है वो अपने स्टॉप लॉस को ट्रेल करता रहता है | इस प्रकार से ट्रेडर बाज़ार के तेज़ी का भरपूर मुनाफा ले सकते है | म्यूचुअल फंड क्या है ?

बुलिश हरामी कैंडलस्टिक पैटर्न में स्टॉप लॉस सेट कहाँ करें? 

बुलिश हरामी कैंडलस्टिक पैटर्न / Bullish Harami Candlestick Pattern में ट्रेडर को अपना स्टॉप लॉस बुलिश हरामी कैंडल के low पर लगाना चाहिए |

बुलिश हरामी कैंडलस्टिक पैटर्न में स्टॉप लॉस सेट कहाँ करें? 

उक्त उदाहरण की माने तो ट्रेडर अपना स्टॉप लॉस 600 के लेवल पर लगायेंगे |

सारांश(Summary):-

मेरे प्रिय पाठकों आज के इस लेख बुलिश हरामी कैंडलस्टिक पैटर्न / Bullish Harami Candlestick Pattern Full details in hindi में हम सबने जाना कि बुलिश हरामी कैंडल / Bullish Harami Candle क्या होता है, बुलिश हरामी कैंडलस्टिक पैटर्न क्या है, इसके निर्माण के पीछे ट्रेडर की कौन सी सायकोलॉजी कार्य करती है | इसके साथ हम सबने जाना कि इस पैटर्न में ट्रेडर अपना टार्गेट तथा स्टॉप लॉस कहाँ लगाते है |

मै आशा करता हूँ कि अब आपको बुलिश हरामी कैंडलस्टिक पैटर्न / Bullish Harami Candlestick Pattern में ट्रेड करने में किसी प्रकार की समस्या नहीं होगी | आपको हमारा यह पोस्ट कैसा लगा हमें कमेन्ट कर अवश्य बताये | यदि आपको यह लेख अच्छा लगा हो तो इसे अपने दोस्तों के साथ अवश्य शेयर करें |

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