बुक वैल्यू क्या है / PB Ratio Kya Hai? जाने विस्तार से !

दोस्तों, अपने इस लेख बुक वैल्यू क्या है / PB Ratio Kya Hai? जाने विस्तार से ! में हम सब किसी कंपनी के बुक वैल्यू तथा PB रेशियो को विस्तार से जानेंगे | PE रेशियो की तरह PB रेशियो भी एक महत्वपूर्ण अनुपात है | अपने पिछले लेख में हम सबने PE रेशियो, ROE तथा ROCE को विस्तार से जाना था |

PB रेशियो के इस लेख में हम सब जानेंगे कि PB Ratio क्या है, बुक वैल्यू क्या है, PB Ratio को कैसे ज्ञात किया जाता है, इसका फार्मूला क्या है, यह हमें क्या दर्शाता है, के साथ-साथ हम समझेंगे कि शेयर बाज़ार में इसका कैसे प्रयोग किया जाता है |

PB रेशियो क्या है / PB Ratio Kya Hai?

किसी कंपनी के PB Ratio से यह पता चलता है कि हम किसी कंपनी के वैल्यू का कितना गुना भुगतान कर रहे है | अर्थात यदि किसी कंपनी का PB रेशियो 6 है तथा हम उस कंपनी के शेयर को खरीदने जा रहे है तो इसका अर्थ है कि हम उस कंपनी के, प्रति शेयर बुक वैल्यू का 6 गुना भुगतान कर उस कंपनी के शेयर को खरीद रहे है |

बुक वैल्यू क्या है / PB Ratio Kya Hai? जाने विस्तार से !

किसी भी कंपनी का 

प्राइस टू बुक रेशियो (PB Ratio) = प्रति शेयर की वर्तमान कीमत / प्रति शेयर बुक वैल्यू

अब शेयर की वर्तमान कीमत तो आपको पता ही होगा, लेकिन अब सवाल ये खड़ा होता है कि बुक वैल्यू क्या है, तो आईये अब हम बुक वैल्यू को समझते है | कैंडलस्टिक पैटर्न

बुक वैल्यू / Book Value

किसी कंपनी की बुक वैल्यू / Book Value उस कंपनी के नेट एसेट को दर्शाता है | किसी कंपनी के पास मुख्यतः दो प्रकार के एसेट होते है | एक तो वो जो खुद कंपनी का होता है तथा दूसरा वो जो वास्तव में तो किसी और का होता है लेकिन कंपनी इसे अपने बिजनेस में प्रयोग करती है | जो भी एसेट कंपनी का नहीं होता है लेकिन कंपनी अपने बिजनेस में प्रयोग करती है तो उसे कंपनी की देनदारी कहा जाता है |

बुक वैल्यू क्या है / PB Ratio Kya Hai? जाने विस्तार से !

अब यदि हम कंपनी के कुल एसेट में से कंपनी की कुल देनदारी को घटा दें तो हमें कंपनी का वो एसेट ज्ञात हो जायेंगे जो वास्तव में कंपनी के खुद का है | अतः किसी कंपनी का

बुक वैल्यू / Book Value = कंपनी के बिजनेस का कुल एसेट – कंपनी की कुल देनदारी

जैसे मान लेते है कि किसी कंपनी X के पास कुल एसेट 500 करोड़ (पूंजी, जमीन, प्लांट, कार, मशीनरी इत्यादि ) है | कंपनी इन्ही से अपना बिजनेस कर रही है | इसमें से कंपनी ने 50 करोड़ रुपये का कर्ज लिया है जिसे आज नहीं तो कल वापस करना है अर्थात देनदारी है | इस स्थिति में कंपनी की बुक वैल्यू / Book Value = 500 – 50 = 450 करोड़ रुपये |

इसका अर्थ यह है कि यदि कंपनी को अपना बिजनेस आज ही बंद करना पड़े तो कंपनी के वास्तविक एसेट (450 करोड़ रूपये) को इस कंपनी के शेयर होल्डर के बीच में बाँट दिया जायेगा | सोते-सोते पैसे कमाए

प्रति शेयर बुक वैल्यू(Book Value Per Stocks)

यदि किसी कंपनी के बुक वैल्यू में उस कंपनी के कुल आउट स्टैंडिंग शेयर की संख्या से भाग दे दिया जाय तो हमें उस कंपनी का प्रति शेयर बुक वैल्यू (Book Value Per Stocks) ज्ञात हो जाता है | जैसे – हम मान कर चलते है कि किसी कंपनी X के शेयर बाज़ार में कुल आउट स्टैंडिंग शेयर की संख्या 1 करोड़ है तथा कंपनी X का बुक वैल्यू 450 करोड़ रुपये है तब कंपनी X का

प्रति शेयर बुक वैल्यू = कंपनी की बुक वैल्यू / कुल आउट स्टैंडिंग शेयर की संख्या

प्रति शेयर बुक वैल्यू = 450 करोड़ / 1 करोड़

प्रति शेयर बुक वैल्यू = 4500000000 / 10000000

प्रति शेयर बुक वैल्यू = 450 रुपये |

स्पष्ट है कि इस स्थिति में कंपनी X का प्रति शेयर बुक वैल्यू = 450 रुपये है |

इससे हमें यह पता चलता है कि यदि कंपनी आज अभी से बंद हो जाये तो शेयर होल्डर को प्रति शेयर के बदले 450 रुपये मिलेंगे | कंपनी का CMP(Current Market Price) कुछ भी हो इससे फर्क नहीं पड़ता है | डोजी कैंडलस्टिक पैटर्न

प्राइस टू बुक रेशियो का उदाहरण (Example of PB Ratio)

प्राइस टू बुक रेशियो का उदाहरण को समझने के लिए हम मान कर चलते है कि कंपनी X के 1 शेयर की वर्तमान कीमत 3200 रुपये है तथा कंपनी X का बुक वैल्यू 450 करोड़ रुपये है तब कंपनी X का

प्राइस टू बुक रेशियो (PB Ratio) = प्रति शेयर की वर्तमान कीमत / प्रति शेयर बुक वैल्यू

प्राइस टू बुक रेशियो (PB Ratio) = 3200 / 450

प्राइस टू बुक रेशियो (PB Ratio) = 7.11

अर्थात यदि आप कंपनी X का शेयर 3200 रुपये पर खरीदते है तब आप इस कंपनी के प्रति शेयर बुक वैल्यू के 7.11 गुना कीमत दे रहे है |

प्राइस टू बुक रेशियो को आसानी से कैसे चेक करें

हम जब भी शेयर बाज़ार के किसी कंपनी का फंडामेंटल एनालिसिस करते है तब हम उस कंपनी के Dividend Yield, ROCE, ROE, PE रेशियो तथा PB Ratio का अध्ययन अवश्य करते है | वैसे इन सब रेशियो को जानने के लिए किसी प्रकार का कोई गणना करने की आवश्यकता नहीं पड़ती है | आज के इस इन्टरनेट के दौर में आज एक क्लीक पर इसे देख सकते है | 

इसके लिए आपको शेयर बाज़ार के कंपनियों के विवरण प्रदर्शित करने वाली वेबसाइट पर जाकर आप इसे बड़ी आसानी से देख सकते है जैसे https://www.screener.in/, https://www.moneycontrol.com/, https://www.tickertape.in/ इत्यादि वेबसाइट पर जाकर आप कंपनी का नाम सर्च कर बड़ी आसानी से चेक कर सकते है | तीन सफेद सिपाही कैंडलस्टिक पैटर्न

बाज़ार में प्राइस टू बुक रेशियो का प्रयोग कैसे करें

अब हम ये समझते है कि इस प्राइस टू बुक रेशियों का प्रयोग शेयर बाज़ार में कैसे किया जा सकता है |

  1. जब कंपनी का PB रेशियो 1 है :- यदि किसी कंपनी का PB Ratio 1 है तो इसका अर्थ है कि कंपनी का शेयर अपने वास्तविक वैल्यू पर ट्रेड कर रहा है | ये कंपनी न तो प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा है और न ही अंडर वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रही है |
  2. जब कंपनी का PB रेशियो 1 से अधिक हो :- यदि किसी कंपनी का PB Ratio 1 से अधिक है तो इसका अर्थ है कि कंपनी का शेयर प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा है | जिस कंपनी का जितना अच्छा ब्राण्ड वैल्यू तथा जितना अच्छा ग्रोथ होता है वो कंपनी उतने ही अधिक प्रीमियम पर ट्रेड करता है | जिस कंपनी के प्रॉफिट तेज़ी से ग्रो कर रहे है उन कंपनी का PE रेशियो तथा PB रेशियो अधिक होता है, इसे Overvalued Stock नहीं कहा जायेगा | 
  3. जब कंपनी का PB रेशियो 1 से कम है :- यदि किसी कंपनी का PB Ratio 1 से कम है तो इसका अर्थ है कि कंपनी का शेयर अपने वास्तविक वैल्यू से निचे ट्रेड कर रहा है | ऐसी स्थिति तब आती है जब कंपनी में ग्रोथ नहीं होती है इसके विपरीत कंपनी के प्रॉफिट तथा सेल्स गिर रहे हो | ऐसे में कंपनी का शेयर कोई खरीदने के लिए तैयार नहीं होता है और शेयर निचे गिरते जाते है और PB रेशियो 1 से कम हो जाता है | नेशनल स्टॉक एक्सचेंज क्या है

PB रेशियो की सीमाएँ (Limits of PB Ratio)

बाज़ार में कार्य करने वाली ज्यादातर कंपनियों के पूंजी, जमीन, प्लांट, कार, मशीनरी (Tangible assets) इत्यादि उनका मुख्य एसेट होता है लेकिन कुछ सेक्टर ऐसे होते है जिनमें प्लांट, कार, मशीनरी इत्यादि कुछ खास आवश्यकता नहीं पड़ती है | जैसे IT(Information Technology) सेक्टर, अब ये सेक्टर ऐसा है कि इसमें किसी प्लांट या मशीनरी की आवश्यकता नहीं पड़ती है | इनके कर्मचारी ही इनके एसेट होते है, ऐसे में इन सेक्टर में कार्य करने वाले कंपनियों का PB रेशियो हमेशा अधिक होता है |

यदि आप किसी कंपनी के सही PB रेशियो का अंदाजा नहीं लगा पा रहे है तब आपको उसी सेक्टर में कार्य कर रही अन्य कंपनियों के PB रेशियो से तुलना करनी चाहिए | मल्टीबैगर स्टॉक (Multibagger Stock) को कैसे पहचाने ?

ओवरवैल्यूड स्टॉक (Overvalued Stock)

अब सवाल ये है कि जिन कंपनी के प्रॉफिट तेज़ी से ग्रो कर रहे है उन कंपनी का PB रेशियो अधिक होने पर ओवरवैल्यूड स्टॉक नहीं कहा जायेगा तो आखिर ओवरवैल्यूड स्टॉक किसे कहा जायेगा, आईये इसे समझते है | हम जानते है कि तेज़ी से ग्रो करने वाले कंपनी का PB रेशियो अधिक होता है लेकिन यदि कोई ऐसा शेयर है जो अपने प्रॉफिट को तेज़ी से नहीं बढ़ा पा रहा है लेकिन कंपनी का शेयर तेज़ी से ऊपर चला जाता है तब इसे ओवर वैल्यूड स्टॉक (Over valued Stock) कहा जायेगा |

ऐसा तब होता है जब कोई कंपनी अपने ख़राब दौर से गुजर रही हो तथा कंपनी के प्रॉफिट तथा सेल्स लगातार गिर रहे हो | यदि ऐसी कंपनी में निवेशको को उम्मीद है कि आने वाले कुछ महीनों में कंपनी के फंडामेंटल में सुधार आयेगा तथा कंपनी के प्रॉफिट तथा सेल्स भी सुधर जायेंगे, तब वे कंपनी के शेयर में खरीदारी करना आरंभ कर देते है | इस कारण से कंपनी का शेयर तेज़ी से ऊपर चला जाता है |

ओवरवैल्यूड स्टॉक तथा  अंडरवैल्यूड स्टॉक कौन है

ध्यान देने वाली बात ये है कि अभी तक कंपनी के फंडामेंटल, सेल्स तथा प्रॉफिट सुधरे नहीं है बल्कि आने वाले दिनों में सुधरने के आसार है, भविष्य में जब भी कंपनी के फंडामेंटल में सुधार हो जायेगा तथा अर्निंग ग्रो करने लगेगी तब कंपनी के एसेट में बढ़ोतरी होगी, लेकिन कंपनी का शेयर आज ही ऊपर चला गया है | इस स्थिति में भी कंपनी का PB रेशियो 1 से अधिक हो जाता है | इस प्रकार के कंपनी के शेयर को ओवरवैल्यूड स्टॉक कहा जाता है |

लेकिन यदि किसी अच्छी फंडामेंटल तथा ग्रोविंग कंपनी का PB रेशियो 1 से अधिक होता है तब उसे प्रीमियम पर ट्रेड करना कहा जाता है | कभी कभी अच्छी फंडामेंटल तथा ग्रोविंग कंपनी भी ओवरवैल्यूड हो जाती है लेकिन लगातार अच्छी ग्रोथ के कारण उनकी वैलुएशन एडजस्ट हो जाती है | स्टॉप लॉस क्या है?

अंडरवैल्यूड स्टॉक(Undervalued Stocks)

जब किसी कंपनी के फंडामेंटल बहुत अच्छा हो तथा लगातार अपने सेल्स और प्रॉफिट को ग्रो कर रही हो लेकिन किसी बाहरी कारण के वजह कंपनी का शेयर ऊपर न जा पा रहा हो या निचे गिर रहा हो तब कंपनी का PB रेशियो 1 से कम हो या अधिक, कंपनी का शेयर अंडरवैल्यूड स्टॉक(Undervalued Stocks) हो जाता है |

जब लगातार नुकसान में जा रही ख़राब फंडामेंटल की कंपनी का शेयर लगातार गिरता जाता है तब भी कंपनी का PB रेशियो 1 से कम हो सकता है लेकिन ऐसी कंपनी अंडरवैल्यूड स्टॉक(Undervalued Stocks) नहीं कहा जाता है बल्कि ऐसी कंपनी को फेयर वैलुएशन वाला शेयर कहा जाता है |

इस लेख से सम्बंधित प्रश्नोत्तरी

बुक वैल्यू कैसे निकालते हैं?

किसी कंपनी के पास मुख्यतः दो प्रकार के एसेट होते है | एक तो वो जो खुद कंपनी का होता है तथा दूसरा वो जो वास्तव में तो किसी और का होता है लेकिन कंपनी इसे अपने बिजनेस में प्रयोग करती है | जो भी एसेट कंपनी का नहीं होता है लेकिन कंपनी अपने बिजनेस में प्रयोग करती है तो उसे कंपनी की देनदारी कहा जाता है |
अब यदि हम कंपनी के कुल एसेट में से कंपनी की कुल देनदारी को घटा दें तो हमें कंपनी का वो एसेट ज्ञात हो जायेंगे जो वास्तव में कंपनी के खुद का है | अतः किसी कंपनी का

बुक वैल्यू / Book Value = कंपनी के बिजनेस का कुल एसेट – कंपनी की कुल देनदारी

बुक वैल्यू का मतलब क्या होता है?

बुक वैल्यू का मतलब किसी कंपनी के अपने खुद के एसेट से है | किसी कंपनी के पास मुख्यतः दो प्रकार के एसेट होते है | एक तो वो जो खुद कंपनी का होता है तथा दूसरा वो जो वास्तव में तो किसी और का होता है लेकिन कंपनी इसे अपने बिजनेस में प्रयोग करती है | जो भी एसेट कंपनी का नहीं होता है लेकिन कंपनी अपने बिजनेस में प्रयोग करती है तो उसे कंपनी की देनदारी कहा जाता है |
अब यदि हम कंपनी के कुल एसेट में से कंपनी की कुल देनदारी को घटा दें तो हमें कंपनी का वो एसेट ज्ञात हो जायेंगे जो वास्तव में कंपनी के खुद का है | यही हमारा बुक वैल्यू होता है |

क्या होगा अगर बुक वैल्यू ज्यादा है?

जब कंपनी का PB रेशियो 1 से अधिक हो :- यदि किसी कंपनी का PB Ratio 1 से अधिक है तो इसका अर्थ है कि कंपनी का शेयर प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा है | जिस कंपनी का जितना अच्छा ब्राण्ड वैल्यू तथा जितना अच्छा ग्रोथ होता है वो कंपनी उतने ही अधिक प्रीमियम पर ट्रेड करता है | जिस कंपनी के प्रॉफिट तेज़ी से ग्रो कर रहे है उन कंपनी का PE रेशियो तथा PB रेशियो अधिक होता है, इसे Overvalued Stock नहीं कहा जायेगा |

PB रेशियो क्या है

किसी कंपनी के PB Ratio से यह पता चलता है कि हम किसी कंपनी के वैल्यू का कितना गुना भुगतान कर रहे है | अर्थात यदि किसी कंपनी का PB रेशियो 6 है तथा हम उस कंपनी के शेयर को खरीदने जा रहे है तो इसका अर्थ है कि हम उस कंपनी के, प्रति शेयर बुक वैल्यू का 6 गुना भुगतान कर उस कंपनी के शेयर को खरीद रहे है |

PB रेशियो को कैसे ज्ञात करें ?

प्राइस टू बुक रेशियो (PB Ratio) = प्रति शेयर की वर्तमान कीमत / प्रति शेयर बुक वैल्यू

बुक वैल्यू और रियल वैल्यू में क्या अंतर है?

किसी भी कंपनी का बुक वैल्यू उस कंपनी के वास्तविक संपत्ति को दर्शाता है जबकि रियल वैल्यू उस कंपनी की अनुमानित कीमत को दर्शाती है | जब किसी कंपनी के कुल एसेट में से उस कंपनी की देनदारी को घटा दिया जाता है तब उस कंपनी की बुक वैल्यू ज्ञात हो जती है जबकि शेयर बाज़ार में ट्रेड हो रहे कंपनी के शेयर उस कंपनी के रियल वैल्यू बताते है |

आज हमने जाना(Today We Learned)

आज बुक वैल्यू क्या है / PB Ratio Kya Hai? जाने विस्तार से ! के इस लेख में हम सबने PB रेशियो तथा बुक वैल्यू से जुड़े सभी बिन्दुओ पर चर्चा किया तथा जाना कि PB रेशियो क्या है, बुक वैल्यू क्या है, प्रति शेयर बुक वैल्यू क्या है तथा हमने जाना कि शेयर बाज़ार में PB रेशियो का कैसे उपयोग किया जाता है |

मुझे आशा है कि अब आपको PB रेशियो तथा बुक वैल्यू से सम्बंधित समस्त प्रकार के सवालो के जवाब मिल गए होंगे | यदि आपको हमारा यह पोस्ट अच्छा लगा हो तो इसे अपने दोस्तों के साथ अवश्य शेयर करें |

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हेल्लो दोस्तों, मै पिछले 8 वर्षो से शेयर बाज़ार में निवेश तथा रिसर्च कर रहा हूँ | मै अपने अनुभव को Finohindi के माध्यम से आपके साथ सच्चाई के साथ सीधे तथा साफ शब्दों में बाटना चाहता हूँ | यदि आप शेयर बाज़ार में निवेश, ट्रेड करते है या आपकी शेयर बाज़ार में रूचि है तो आप सही जगह पर है

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